• September 8, 2024

कौन सी बात से परेशान हैं बांग्लादेश की तसलीमा नसरीन? रोया दुखड़ा- …तो मैं मर ही जाऊंगी

कौन सी बात से परेशान हैं बांग्लादेश की तसलीमा नसरीन? रोया दुखड़ा- …तो मैं मर ही जाऊंगी
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Taslima Nasreen: बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन इन दिनों रेसिडेंट परमिट को लेकर फिलहाल काफी परेशान हैं. उन्होंने बताया कि साल 2011 से ही वह भारत में रह रही हैं. उनका रेसिडेंट परमिट 27 जुलाई को ही खत्म हो चुका है लेकिन अभी तक भारत सरकार की तरफ से उसे रिन्यू नहीं किया गया. भारत में रहना उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन करीब डे़ढ़ महीने से उनका रेसिडेंट परमिट रिन्यू नहीं किया गया. 

मूल रूप से बांग्लादेशी लेखिक ने एक टीवी चैनल से कहा, “मुझे नहीं पता कि किससे बात करनी है. गृह मंत्रालय में इस मसले को लेकर कौन मुझसे संपर्क करेगा. मेरी किसी से बातचीत नहीं होती है. मैं ऑनलाइन स्टेटस चेक करती रहती हूं, लेकिन अभी तक कोई कन्फर्मेशन नहीं मिला है. वेबसाइट पर अपडेटिंग ही शो कर रहा है. इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, रेसिडेंट परमिट रद्द होने से पहले ही रिन्यू हो जाता था.” तसलीमा बांग्लादेश से निर्वासन के बाद लंबे समय तक यूरोप में रह चुकी है. इसके बाद उन्होंनें भारत में रहने का फैसला किया. शुरुआत में उन्हें कम दिनों की परमिट मिलता थ पर साल 2011 से तसलीमा लगातार दिल्ली में रह रही हैं. 

बांग्लादेश के हालात से तसलीमा का संबंध?

तसलीमा नसरीन से जब पूछा गया कि क्या बांग्लादेश के मौजूदा हालात परमिट एक्सटेंशन में बाधा बन रहे हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा, “बांग्लादेश की राजनीति से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. मैं तो इस विवाद के पहले से ही भारत में रह रही हूं. मैं यहां स्वीडिश नागरिक के तौर पर रहती हूं, इसके अलावा बांग्लादेश में बने हालात से पहले ही मेरा रेसिडेंस परमिट रद्द हो गया था. साल 2017 में भी दिक्कत हुई थी, लेकिन उस समय तकनीकी समस्या थी.” 

कोलकाता में भी रह चुकी हैं तसलीमा

बांग्लादेशी लेखिका के मुताबिक, “लोगों को लगता है कि मेरी सरकार और नेताओं के साथ पहचान है, लेकिन ऐसा नहीं है. मुझे अगर भारत में रहने का परमिट नहीं मिली तो मैं मर ही जाऊंगी, अब मेरी कहीं जाने की अवस्था नहीं है.” दरअसल, तसलीमा साल 1994 से निर्वासन की स्थिति में हैं, कई सालों तक यूरोप में रहने के बाद साल 2004-2005 में वो भारत आ गईं. शुरुआत में उन्होंने कोलकाता में रहने का फैसला किया. यहां पर उन्होंने अपना घर भी बसा लिया था, लेकिन भारी विरोध के बाद साल 2007 में वो जयपुर चलीं गईं और साल 2011 से दिल्ली में रह रही हैं.  

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