• December 15, 2024

पाकिस्तान में पैसों का समंदर बहाने जा रहा चीन! जानें कैसे बढ़ेगी भारत की टेंशन

पाकिस्तान में पैसों का समंदर बहाने जा रहा चीन! जानें कैसे बढ़ेगी भारत की टेंशन
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China Invest in Pakistan: चीन के एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने यहां राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की और पाकिस्तान में एक मेडिकल सिटी स्थापित करने के लिए एक अरब डॉलर का निवेश करने में रुचि जताई है. एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई. पाकिस्तान के चीन के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं, जिसने कई निवेशों और विकास परियोजनाओं के माध्यम से पाकिस्तान को समर्थन दिया है. 

इन परियोजनाओं में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना भी है, जिसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए ‘जीवन रेखा’ कहा गया है. गुरुवार (12 दिसंबर, 2024) को जरदारी के साथ बैठक के दौरान चीनी निवेशकों के प्रतिनिधिमंडल ने कराची के धाबेजी आर्थिक क्षेत्र में मेडिकल सिटी बनाने में एक अरब डॉलर का निवेश करने की अपनी योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की. यह आर्थिक क्षेत्र पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर और वित्तीय केंद्र से बाहर है. 

सिंध सरकार और चीनी निवेशकों के बीच बैठक

मेडिकल सिटी पाकिस्तान का पहला पूरी तरह से एकीकृत फार्मास्युटिकल और मेडिकल पारिस्थितिकी तंत्र होगा. कोरंगी व्यापार एवं उद्योग संघ (केएटीआई) को धाबेजी आर्थिक क्षेत्र के संचालन का दायित्व सौंपा गया है. केएटीआई ने एक बयान में कहा कि चीनी निवेशकों की ओर से किया गया यह वादा दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों का एक उदाहरण है. सिंध सरकार और चीनी निवेशकों के समूह के बीच सफल वार्ता के बाद यह बैठक आयोजित की गई, जिसमें सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह और चीन के महावाणिज्य दूत भी शामिल हुए.

बयान के अनुसार, राष्ट्रपति जरदारी ने पाकिस्तान और चीन के बीच गहन आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला.

क्या है सीपीईसी प्रोजेक्ट?

चीन पाकिस्तान के बीच सीपीईसी परियोजना 62 बिलियन डॉलर की है, जो चीन के काशगर से लेकर पाकिस्तान के अरब सागर बंदरगाह ग्वादर तक बनाई जा रही है. सीपीईसी के मुख्य फोकस ग्वादर बंदरगाह का विकास करना है. हालांकि, सीपीईसी प्रोजेक्ट का भारत हमेशा से विरोध करता आया है. वो इसलिए क्योंकि ये परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजर रही है.

यह भी पढ़ें- ‘नरसिम्हा राव ने की थी शुरुआत’, विदेश नीति में बदलाव को लेकर बोले एस जयशंकर



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