• November 3, 2025

‘पापा मेरा बैट टूट गया और अब…’, शेफाली वर्मा ने पिता से कही थी ये बात; सुनाया भावुक किस्सा

‘पापा मेरा बैट टूट गया और अब…’, शेफाली वर्मा ने पिता से कही थी ये बात; सुनाया भावुक किस्सा
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शेफाली वर्मा की किस्मत देखिए, वह वनडे वर्ल्ड कप 2025 के लिए टीम का हिस्सा नहीं थी. प्रतिका रावल बतौर ओपनिंग बल्लेबाज शानदार प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन सेमीफाइनल से पहले वह बुरी तरह चोटिल हो गईं. इस कारण प्रतिका को टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा, फिर शेफाली को टीम में शामिल किया गया. वह सेमीफाइनल में सिर्फ 10 रन बनाकर आउट हो गई, लेकिन फाइनल में 87 रनों की यादगार पारी खेलकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवा लिया. उनके पिता ने एक बचपन का भावुक किस्सा सुनाया, जब शेफाली का बैट टूट गया था.

शेफाली वर्मा के पिता संजीव वर्मा पेशे से ज्वेलर्स हैं, उन्होंने ही बेटी को क्रिकेट के शुरूआती गुर सिखाए. आज भी जब शेफाली को कोई बड़ा निर्णय लेना होता है तो वह अपने पिता से सलाह लेती हैं. आज अपनी बल्लेबाजी से अच्छे अच्छे गेंदबाजों की कुटाई करने वाली शेफाली बचपन में प्लास्टिक के बल्ले से खेलती थी. शुरुआत से ही उनका ध्यान क्रिकेट पर था,  उन्होंने सचिन तेंदुलकर को देखकर क्रिकेटर बनने की ठानी थी.

शेफाली वर्मा के पिता ने सुनाया भावुक किस्सा

अमर उजाला की रिपोर्ट में संजीव वर्मा के हवाले से बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन शेफाली का क्रिकेट के प्रति जूनून अडिग था. वह बचपन में प्लास्टिक के बैट से खेलती थी, उन्होंने लगातार प्रयास करते हुए अपनी तकनीक और टाइमिंग को बेहतर किया. उनके पिता ने बताया कि वह शुरुआत से सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान देती थी, वह रोजाना बल्लेबाजी का अभ्यास करती और खुद को बेहतर बनाती थी.

15 साल की उम्र में शेफाली वर्मा ने भारतीय महिला टी20 टीम में जगह बनाई थी, जून 2021 तक वह भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई. रिपोर्ट में उनके पिता ने बताया कि एक बार प्रैक्टिस करते समय शेफाली का बैट टूट गया था. तब उन्होंने कहा कि पापा इस बैट से गेंद बॉउंड्री पार नहीं जाएगी. पिता तब स्कूटर से मेरठ गए और 6 ब्रांड के बैट लेकर लौटे. उन्होंने कहा कि शेफाली की आंखों में क्रिकेट था, मैं उसे कैसे रोक सकता था.

सचिन को देखने के बाद लिया संकल्प

शेफाली क्रिकेट तो बचपन से खेलती थी, लेकिन उन्होंने 2013 में ठान लिया कि वह क्रिकेटर ही बनेंगी. ये संकल्प उन्होंने सचिन तेंदुलकर को रणजी ट्रॉफी मैच खेलते हुए देखने के बाद लिया. वह शुरुआत में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थी ताकि उनकी बैटिंग मजबूत हो, इसके बाद उन्होंने अपने खेल को एकेडमी में निखारा. क्रिकेट खेलते हुए उनका ध्यान न भटके, इसके लिए शेफाली ने अपने बाल भी कटवा लिए थे.



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