• February 28, 2025

‘चुनावों में हत्याएं और हिंसा न हो, इसके लिए…’, बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी नेता ने की मांग

‘चुनावों में हत्याएं और हिंसा न हो, इसके लिए…’, बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी नेता ने की मांग
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Elections in Bangladesh : बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के सेक्रेटरी जनरल प्रोफेसर मिया गुलाम परवार ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सामने देश में आम चुनाव कराने से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से क्षेत्रीय सरकार का चुनाव कराने की अपनी पार्टी की मांग को दोहराया. प्रोफेसर मिया गुलाम ने अपनी पार्टी की मांग को शुक्रवार (28 फरवरी) को राजबाड़ी में आयोजित जमात के कार्यकर्ता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए उठाया.

कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रोफेसर मिया गुलाम ने कहा, “अगर बांग्लादेश की सरकार सच में निष्पक्ष और ईमानदार तो चुनाव आयोग ऐसे चुनाव करा सकता है.” उन्होंने अधिकारियों से एक तय समयसीमा इलेक्टोरल सिस्टम में सुधार कर चुनाव की तारीख की घोषणा करने का अनुरोध किया. इसके अलावा चुनाव के दौरान किसी तरह का खून-खराबा और हिंसा ने हो, इसके लिए उन्होंने देश में आम चुनाव से पहले शेख हसीना समेत फासीवाद के लिए जिम्मेदार उन सभी लोगों पर इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल में इंसानियत के विरुद्ध अपराध के लिए मुकदमा चलाया जाए.

पिछले 16-17 सालों से अंधकार युग में थे बांग्लादेश

प्रोफेसर गुलाम ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि देश में राष्ट्रीय चुनाव के पहले न्याय, सुधार और क्षेत्रीय चुनाव को पूरा किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले 16-17 सालों से बांग्लादेश एक अंधकार के युग से गुजरा है, जहां लोगों को वोट देने का अधिकार का नहीं था और जहां लोकतंत्र का कोई अस्तित्व नहीं था.

उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश से इस्लामिक मूल्यों और देश की पहचान को मिटाने की साजिश चल रही है.” प्रोफेसर मिया गुलाम ने न्यायपालिका पर राजनीति से प्रेरित होने और भ्रष्ट होने का आरोप लगाया और कहा कि देश को लूट, फिरौती, हत्याएं और आतंकवाद भी देखना पड़ा. साथ ही निर्दोष इस्लामिक स्कॉलर, दाढ़ी वाले पुरुषों और धार्मिक लोगों को भी गिरफ्तार कर जेलों में डाला गया.

पूर्व नेताओं को जमात-ए-इस्लामी के नेता ने किया याद

इसके बाद उन्होंने पूर्व नेता मोतिउर रहमान निजामी के साथ अलि अहसान मुजाहिद, कमरुज्जमां, अब्दुल कादर मोल्ला और मीर कासिम अली को याद करते हुए कहा कि उन्हें राजनीति लाभ के लिए मार दिया गया. इसके अलावा कई अन्य प्रमुख नेताओं को झूठे आरोपों के तहत जेल में डाल दिया गया और उन्हें वहां मरने के लिए छोड़ दिया गया.

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