- March 17, 2026
ट्रंप को बड़ा झटका, ईरान युद्ध पर अमेरिका में ‘बगावत’, US काउंटर टेररिज्म चीफ ने दिया इस्तीफा
ईरान के साथ जारी जंग को लेकर अमेरिका के भीतरखाने विरोध के सुर उभरते दिख रहे हैं. यूएस काउंटर टेररिज्म सेंटर के प्रमुख जो केंट ने मंगलवार (17 मार्च) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह ईरान के साथ जारी युद्ध को बताया. उन्होंने कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते हैं. इससे पहले 16 मार्च को व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सलाहकार समीरा मुंशी भी इसी के चलते इस्तीफा दे चुकी हैं.
‘युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता’
जो केंट ने कहा, उन्होंने काफी सोच विचार के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ जारी युद्ध किसी भी तरह से अमेरिकी लोगों के लिए फायदेमंद नहीं है. साथ ही जंग छिड़ने के पीछे इजरायल के दबाव को भी बड़ा कारण बताया. केंट ने कहा, वह किसी भी कीमत पर युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप को लिखा पत्र
यूएस काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखा. उन्होंने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को लेकर निराशा जताई. उन्होंने कहा, मैं ईरान के साथ जारी युद्ध का समर्थन बिल्कुल भी नहीं कर सकता हूं. ईरान हमारे देश के लिए तत्काल कोई खतरा नहीं है. केंट ने यह भी कहा कि युद्ध की शुरुआत इजरायल और उसके शक्तिशाली अमेरिकी समर्थकों के दबाव के चलते हुई है. उन्होंने ईरान के साथ जारी जंग को अमेरिकी लोगों के हितों के खिलाफ बताया.
कट्टर समर्थक में थी गिनती
बता दें कि एक समय जो केंट की गिनती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थकों में की जाती थी. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में वह ट्रंप और उनकी विदेश नीतियों की खुलकर प्रशंसा करते थे.
समीरा मुंशी भी दे चुकीं इस्तीफा
बता दें इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धार्मिक स्वतंत्रता समिति में सेवा देने वाली एकमात्र मुस्लिम महिला समीरा मुंशी भी अपने पद से इस्तीफा दे चुकी हैं. उन्होंने भी ईरान के साथ जारी युद्ध को इसकी वजह बताया था. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त और व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सलाहकार के रूप में कार्यरत थीं. उन्होंने ईरान के साथ युद्ध को अवैध बताते हुए तर्क दिया कि यह स्पष्ट संवैधानिक या संसदीय प्राधिकरण के बिना शुरू किया गया.
उन्होंने दावा किया कि आस्थावान लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी जा रही है और उनके जीवन को खतरे में डाला जा रहा है, क्योंकि वे फिलिस्तीन के बारे में अपनी गहरी आस्था रखते हैं और यह सब एक ज़ायोनी राजनीतिक एजेंडा के लिए किया जा रहा है.