• March 16, 2026

ट्रंप की इकलौती मुस्लिम मंत्री समीरा मुंशी कौन? इस बात से खफा, छोड़ दिया अमेरिकी राष्ट्रपति का

ट्रंप की इकलौती मुस्लिम मंत्री समीरा मुंशी कौन? इस बात से खफा, छोड़ दिया अमेरिकी राष्ट्रपति का
Share

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धार्मिक स्वतंत्रता समिति में सेवा देने वाली एकमात्र मुस्लिम महिला समीरा मुंशी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि वो विरोध में पद छोड़ रही हैं. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त और व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की सलाहकार के रूप में कार्यरत थीं.

उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा इस प्रशासन द्वारा देश और विदेश में किए जा रहे अन्याय और अत्याचारों के कारण है. पोस्ट में उन्होंने अपने इस्तीफे के कारणों का विस्तार से जिक्र किया है. मुंशी ने कहा कि वह दो ऐसे घटनाक्रमों के विरोध में पद छोड़ रही हैं जिन्हें उन्होंने बेहद चिंताजनक बताया.

इन 2 मामलों को लेकर दिया रिजाइन
पहला मामला कमिश्नर कैरी प्रीजेन-बोलर को उनके पद से हटाने का था, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह फिलिस्तीन के बारे में उनकी मान्यताओं के कारण हुआ. दूसरा मुद्दा ईरान के खिलाफ सरकार का अवैध युद्ध. जिसके बारे में उन्होंने तर्क दिया कि यह स्पष्ट संवैधानिक या संसदीय प्राधिकरण के बिना शुरू किया गया. 

अमेरिका में मुसलमानों को लेकर क्या कहा
मुंशी ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग के कुछ सदस्यों ने मेरे धर्म का उपहास किया और मेरे समुदाय के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार किया. मुंशी ने दावा किया कि अमेरिकी मुसलमानों के अधिकारों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिवार, जिसमें ईसाई और मुस्लिम दोनों शामिल हैं, धार्मिक भेदभाव और उत्पीड़न से भागकर अमेरिका आया था, जिसने धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और अमेरिका को सभी धर्मों के लोगों के लिए एक सुरक्षित स्थान मानने की उनकी धारणा को अब बदल दिया है. 

उन्होंने दावा किया कि आस्थावान लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी जा रही है और उनके जीवन को खतरे में डाला जा रहा है, क्योंकि वे फिलिस्तीन के बारे में अपनी गहरी आस्था रखते हैं और यह सब एक ज़ायोनी राजनीतिक एजेंडा के लिए किया जा रहा है. 

धार्मिक स्वतंत्रता संस्थान की निदेशक रहीं मुंशी ने मिडिल ईस्ट आई को बताया कि सितंबर 2025 से ही वह खुद को अलग-थलग महसूस करने लगी थीं, जब उन्होंने आयोग के समक्ष इस बात की गवाही दी थी कि स्कूलों में फिलिस्तीनियों की इजरायल द्वारा की जा रही हत्याओं के खिलाफ गवाही देना संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है.

ये भी पढ़ें

Iran US War: इज़राइल राजदूत ने बताया 3-पॉइंट प्लान, ईरान पर हमला इसी के तहत




Source


Share

Related post

शांति दूत बना पाकिस्तान अब बन सकता है ‘खलनायक’! ट्रंप के अब्राहम अकॉर्ड्स से फंस गए शहबाज

शांति दूत बना पाकिस्तान अब बन सकता है…

Share Trump’s Abraham Accord: पाकिस्तान के सामने एक ऐसी दुविधा खड़ी हो गई है, जिसमें अगर वह मानता…
‘He was never violent’: White House shooter Nasire Best’s mother breaks silence after seeing son’s death on social media

‘He was never violent’: White House shooter Nasire…

Share The mother of the man shot dead by Secret Service officers near the White House has said…
‘हर देश में बेवकूफ होते हैं’, दिल्ली में किस बात पर बोले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो?

‘हर देश में बेवकूफ होते हैं’, दिल्ली में…

Share अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार (24 मई, 2026) को अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ कथित…