• January 31, 2024

हेल्थ सेक्टर के लिए जीडीपी का 5 फीसदी बजट मिले, जरूरी दवाओं पर से हटे जीएसटी 

हेल्थ सेक्टर के लिए जीडीपी का 5 फीसदी बजट मिले, जरूरी दवाओं पर से हटे जीएसटी 
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Interim Budget: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने वाली हैं. हेल्थ सेक्टर (Health Sector) भी इस बजट से बड़ी उम्मीद लगाए बैठा है. फिलहाल जीडीपी का लगभग 2.5 फीसदी हिस्सा हेल्थकेयर पर खर्च किया जा रहा है. यह दुनिया के अधिकतर विकसित देशों के मुकाबले में काफी कम है. हेल्थ सेक्टर ने इसे बढ़ाकर 5 फीसदी करने की मांग की है. साथ ही आवश्यक दवाओं पर से जीएसटी हटाने की मांग भी की गई है. 

कोरोना महामारी से सीखे सरकार 

वित्त मंत्री के आगामी बजट 2024-25 को लेकर फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ डीके गुप्ता ने कहा कि कोरोना महामारी ने गांवों और शहरी इलाकों के साथ-साथ सरकारी और निजी हेल्थकेयर सिस्टम में क्वालिटी के बड़े फर्क को उजागर किया था. इसलिए सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम में बड़े बदलाव करने चाहिए. यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लिए सरकार को नए उपाय करने होंगे ताकि लोगों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम हो सके. 

हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में किया जाए इनवेस्टमेंट 

मजबूत हेल्थ ईकोसिस्टम बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, एचआर, सर्विस डिलीवरी मेकैनिज्म और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर में इनवेस्टमेंट करना महत्वपूर्ण है. बजट में मिलने वाला पूरा पैसा खर्च होना चाहिए. इसका अधिकतम हिस्सा प्राइमरी केयर स्तर पर खर्च होना चाहिए. विकसित देश के मुकाबले भारत में हेल्थकेयर सेवाएं कमजोर हैं. हेल्थ सेक्टर में सरकारी और निजी निवेश बढ़ाया जाना चाहिए. नए हेल्थकेयर संस्थानों को कर्ज पर ब्याज और टैक्स में छूट मिलनी चाहिए. 

मोबाइल फोन की तर्ज पर मेडिकल डिवाइस पर कम हो कस्टम ड्यूटी 

इसके अलावा मोबाइल फोन की तरह मेडिकल डिवाइस की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए सरकार को बेसिक कस्टम ड्यूटी कम से कम करनी चाहिए. अगर सही नीति अपनाई जाए तो कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की तरह मेडिकल डिवाइस सेक्टर में भी आयात पर निर्भरता कम हो सकती है. सभी डिवाइस पर कम से कम जीएसटी कर लगना चाहिए. चिकित्सा और नर्सिंग एजुकेशन को बेहतर बनाया जाए. 

आवश्यक दवाओं पर से जीएसटी हटाया जाए

आवश्यक दवाओं पर से भी जीएसटी हटा देना चाहिए. सीटी, एमआरआई और कैथलैब जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य उपकरणों को आयात शुल्क मुक्त किया जाए. टियर 2 और टियर 3 शहरों में अस्पताल बढ़ाए जाने चाहिए. सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के लिए पीपीपी मॉडल को अपनाया जाए. आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया की लगभग 60 फीसदी वैक्सीन भारत में बनती हैं. वैक्सीन के लिए यूनिसेफ काफी हद तक भारत पर निर्भर है. देश में रिकॉर्ड 220 करोड़ से ज्यादा कोविड-19 वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं. भारत जेनरिक दवाओं का भी सबसे बड़ा निर्यातक है.

भारत में बेड और डॉक्टरों की बहुत कमी 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में 1000 लोगों पर अस्पतालों में सिर्फ 0.5 बेड उपलब्ध हैं. यहां 143 करोड़ लोगों के लिए सिर्फ 1.25 लाख आईसीयू बेड हैं. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या भी वैश्विक मानकों से बहुत कम है. इस लिहाज से अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है. इसलिए जरूरी है कि स्वास्थ्य का बजट बढ़ाया जाए.

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