• October 22, 2026

PM आवास के पास ‘रेस कोर्स मस्जिद’ को नोटिस, जानें वक्फ बोर्ड में कब से दर्ज और अभी क्या स्थिति?

Share

दिल्ली की ऐतिहासिक ‘रेस कोर्स मस्जिद’ को 6 दिन के भीतर खाली कराने को लेकर दिए गए नोटिस पर विवाद खड़ा हो गया है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर चिंता जताई है और सरकार के कार्रवाई रोकने की मांग की है. आखिर पूरा मामला क्या है, आइए जानते हैं.

मस्जिद का निर्माण कब हुआ?

मस्जिद का निर्माण करीब 125 साल पहले बताया जा रहा है. दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ तनवीर अहमद ने बताया है कि मस्जिद और उससे लगा करीब दो बीघा का कब्रिस्तान 8 सितंबर 1977 को दिल्ली प्रशासन के गजट नोटिफिकेशन के तहत वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया गया है. इसके अलावा मस्जिद का नाम NDMC की हेरिटेज लिस्ट में 22वें नंबर पर दर्ज है और यह UMEED पोर्टल पर भी रजिस्टर्ड है.

मस्जिद को अभी क्या नोटिस मिला?

इमाम की मानें तो मस्जिद को खाली कराने का अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं है, केवल मौखिक रूप से कहा गया है. मस्जिद की लाइट और पानी सप्लाई को 7 अक्टूबर को ही काट दिया गया था. मस्जिद में नमाज होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है. इमाम का कहना है कि कभी नमाज की इजाजत मिल जाती है, कभी नहीं मिलती है. कल तक की स्थिति के मुताबिक बाहरी लोगों को मस्जिद के अंदर आने की इजाजत नहीं थी. अब कल (शुक्रवार) है, देखना होगा कि कल क्या स्थिति रहती है.

मस्जिद के इमाम का क्या कहना है?

मस्जिद के इमाम का कहना है कि मस्जिद के साथ कभी कोई विवाद नहीं रहा है. 7 अक्टूबर को यहां झुग्गियों को तोड़ा गया और मस्जिद का बिजली पानी बंद कर दिया गया. यह वक्फ की संपति है. वक्फ के रूप में रजिस्टर है. 40 साल से मैं यहां का इमाम हूं, कभी कोई शिकायत नहीं रही.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यहां झुग्गियों को लेकर कार्रवाई हुई. दो बीघा कब्रिस्तान वक्फ बोर्ड में गजट है. मामले की जानकारी वक्फ को दी है, जिसके बाद बोर्ड ने लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) को लिखा है कि यह हमारी मस्जिद है. नमाजियों के लिए ये रास्ता एक तरह से बंद है. कभी इजाजत मिल जाती है कभी नही मिलती. एसडीएम चाणक्यपुरी रहीं गीता ग्रोवर के 29 अक्टूबर 2025 को किए गए सर्वे में मस्जिद का कोई जिक्र नहीं है. उसी सर्वे के आधार पर कार्रवाई हुई है.’

NDMC के अधिकारियों का क्या कहना? 

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने NDMC के सीनियर अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह कार्रवाई प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित मस्जिद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के इलाके में रहने वाले कई परिवार भी इससे प्रभावित हुए हैं. अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद प्रबंधन को 19 अक्टूबर के आसपास परिसर खाली करने का नोटिस दिया गया था और इसके लिए छह दिन का समय दिया गया.

नोटिस में कहा गया था कि यह जमीन केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (LDO) की है. इसमें अनधिकृत कब्जे और निर्माण के खिलाफ चेतावनी भी दी गई थी. एलडीओ का कहना है कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर बना है और इसे अतिक्रमण मानता है. अधिकारियों के अनुसार, इलाके के निवासियों को परिसर खाली करने के लिए कहा गया है और उन्हें कुछ किलोमीटर दूर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए गए हैं.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक डेलिगेशन ने रिजिजू को सौंपा ज्ञापन

मस्जिद से करीब 40 साल से जुड़े मोहम्मद हारून ने बताया कि अधिकारियों ने उनसे छह दिनों के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मस्जिद की लाइट और पानी की सप्लाई काट दी गई है. ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ (L&DO) ने सभी गेट बंद कर दिए हैं. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक डेलिगेशन ने किरेन रिजिजू से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा. इसमें मस्जिद और सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित कब्रिस्तान को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है.’

ओवैसी ने रिजिजू से की मामले में दखल देने की अपील

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार (20 अक्टूबर) को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद के मामले में दखल देने की अपील की. ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि 1977 से ही यह मस्जिद एक वक्फ संपत्ति है, फिर भी वक्फ बोर्ड ने इसके गिराए जाने के आदेश को चुनौती नहीं दी. साथ ही, उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने की कोई कोशिश भी नहीं की.

ओवैसी ने कहा, ‘मुसलमानों के इबादतगाहों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? वक्फ संशोधन अधिनियम और धार्मिक स्थल अधिनियम के दुरुपयोग को लेकर हमारी आशंकाएं सच होती दिख रही हैं. सरकार को इन गैरकानूनी धमकियों को वापस लेना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि मस्जिद के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.’

मीरवाइज उमर फारूक ने भी जताई चिंता

कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी मस्जिद को खाली करने के नोटिस के फैसले पर चिंता जताई है. उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘यह बेहद चिंताजनक है कि दिल्ली की ऐतिहासिक ‘रेस कोर्स मस्जिद’, जो 1977 से एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और एक सूचीबद्ध धरोहर स्थल भी है, उसे छह दिन के भीतर खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है. उतनी ही चिंता की बात यह भी है कि वक्फ अधिकारी इसका बचाव करने में नाकाम रहे हैं. क्या मुसलमानों के इबादत स्थलों के लिए यही अब नई परिपाटी बनती जा रही है?’

AIMPLB ने सरकार से की नोटिस को वापस लेने की मांग

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार से तुरंत सरकारी एजेंसी लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के नोटिस को वापस लेने की मांग की है. बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने इस कार्रवाई का विरोध किया है. उन्होंने कहा, जब से भाजपा सत्ता में आई है तो दिल्ली के प्राचीन और ऐतिहासिक मस्जिदों को लगातार निशाना बनाया गया है.

‘कनॉट प्लेस में नेहा बोरा ने नहीं बुलाया था प्रोटेस्ट’, हाईकोर्ट में बड़ा दावा

उन्होंने कहा, ‘रेस कोर्स मस्जिद को सरकारी जमीन पर बनाये जाने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसके ऐतिहासिक अस्तित्व और कानूनी स्थिति के पक्ष में सरकारी रिकॉर्ड में कई दस्तावेज हैं. मस्जिद को नई दिल्ली नगर निगम (NDMC) की ऐतिहासिक इमारतों की सूची में शामिल किया गया है. यह वक्फ के रिकॉर्ड में भी दर्ज है और इसे 1977 में दिल्ली गैजेट में दर्ज किया गया था. यह भारत सरकार के माइनॉरिटी अफेयर्स मंत्रालय की वेबसाइट पर भी सूचीबद्ध है.  

इलियास ने आगे कहा कि इन सभी ऐतिहासिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के बावजूद, मस्जिद को सरकारी जमीन पर कब्जा के रूप में घोषित करना दुखद है. सरकार को तथ्यों को नजरअंदाज करने के बजाय उपलब्ध रिकॉर्डों के आधार पर इस मामले की समीक्षा करनी चाहिए.

उमरा करने सऊदी गए 4000 भारतीय फंसे, ओवैसी ने लगाई सरकार से गुहार, जानें क्या कहा



Source


Share

Related post

‘Safety, security paramount’: Lady Shri Ram College cancels…

Share Lady Shri Ram College cancelled regular classes and shifted them online after a 17-year-old girl was allegedly…
10 से 15 हजार में खरीदें शादी का लहंगा, जानें दिल्ली में कहां लगते हैं ये सस्ते ‘वेडिंग बाजार’

10 से 15 हजार में खरीदें शादी का…

Share Show Quick Read Key points generated by AI, verified by newsroom राजौरी गार्डन में भी खूबसूरत और…
दिल्ली के इस बाजार में मिलते हैं सबसे सस्ते बर्तन, किलो के भाव खरीद लो

दिल्ली के इस बाजार में मिलते हैं सबसे…

Share Delhi Utensil Market: ईरान- यूएस के बीच चल रहे युद्ध की वजह से जहां एक तरफ कई…