• February 11, 2026

मनी लॉन्ड्रिंग केस में फिर पूछताछ की तैयारी, ED ने टीना और अनिल अंबानी को भेजा समन

मनी लॉन्ड्रिंग केस में फिर पूछताछ की तैयारी, ED ने टीना और अनिल अंबानी को भेजा समन
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Tina and Anil Ambani ED Summon:  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने  SBI बैंक फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अनिल अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी को नया समन जारी किया है. जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए टीना अंबानी को 17 फरवरी और उनके पति अनिल अंबानी को इसके अगले दिन यानी कि 18 फरवरी को बुलाया है. इससे पहले ED ने टीना अंबानी को सोमवार, 9 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हुई थीं. 

पिछले साल अगस्त से ED ने अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तीन अलग-अलग केस दर्ज किए और 12000 करोड़ की उनकी संपत्ति भी अटैच की. पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में दी गई अपनी दलील में ED ने ADAG से जुड़े 46 जगहों पर तलाशी, 13 बैंक अकाउंट्स को फ्रीज किए जाने और 12012.45 करोड़ की कीमत की 204 प्रॉपर्टी अटैच किए जाने की जानकारी दी.

जांच के लिए SIT का हुआ गठन 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एजेंसी ने अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ रजिस्टर्ड तीन मनी लॉन्ड्रिंग केस की देखरेख के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) भी बनाई है. इसकी अगुवाई एक एडिशनल डायरेक्टर रैंक के ऑफिसर की अगुवाई में छह अधिकारियों वाली टीम करेगी. इससे पहले 29 जनवरी को जांच एजेंसी 40000 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के पूर्व डायरेक्टर पुनीत गर्ग को गिरफ्तार कर चुकी है. 

पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने दोनों जांच एजेसियों को स्वतंत्र रूप से, जल्दी और निष्पक्ष तरीके से मामले की जांच के आदेश दिए. साथ ही चार हफ्तों में स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने की भी बात कही. सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी की तरफ से केस लड़ रहे सीनियर वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने तक उनके मुवक्किल देश छोड़कर नहीं जाएंगे. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में जमा की गई CBI की दी गई रिपोर्ट की भी जांच की. 

पिछले साल से केस की जांच में जुटी ED

ED पिछले साल से 40000 करोड़ रुपये के बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड के मामले में अनिल अंबानी और उनके ADAG ग्रुप की कंपनियों की की जांच कर रही है. इसी सिलसिले में अब तक प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत तीन एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की जा चुकी हैं. हालांकि, दिसंबर में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप ने एक बयान में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया.

ED के 10000 करोड़ रुपये के प्रोविजनल अटैचमेंट करने के बाद रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा, ”अनिल अंबानी साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में नहीं हैं. रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक है, जो पावर, रोड, मेट्रो रेल और डिफेंस जैसे कई हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में अलग-अलग स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) के जरिए प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रही है.”

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