• August 24, 2026

हिमंत बिस्वा सरमा का आरोप, ‘शरिया प्रथाओं के खिलाफ क्यों नहीं बोलते राहुल गांधी’

Share

पुणे में छात्राओं से संवाद के दौरान मनुस्मृति पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिला अधिकारों के पैरोकार नहीं, बल्कि हिंदू विरोधी हैं. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर असम के सीएम ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी महिला सशक्तीकरण मुद्दे की आड़ में हिंदू धर्म को बदनाम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी शरिया के तहत जारी पितृसत्तात्मक, मध्ययुगीन प्रथाओं के खिलाफ कभी उसी तरह के आक्रोश के साथ नहीं बोलते.

उन्होंने कहा, ‘‘जरा सोचिए, राहुल गांधी ने शरिया के तहत कायम पितृसत्तात्मक और मध्ययुगीन प्रथाओं के खिलाफ इसी तरह कितनी बार आक्रोश के साथ आवाज उठाई है? कभी नहीं. जबकि शरिया इस्लामी का आधार है, वहीं मनुस्मृति को हिंदू धर्म में ऐसी कोई तुलनीय शास्त्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है. यह हिंदुओं के लिए कोई सार्वभौमिक रूप से बाध्यकारी संहिता भी नहीं है. हिंदू धर्म की असली ताकत समय के साथ बदलने, सुधार करने और ढलने की उसकी अनोखी क्षमता में है, जैसा कि यह हजारों सालों से होता आया है और हमेशा होता रहेगा.

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘हर हिंदू को यह पूछना चाहिए कि राहुल गांधी का असली मकसद क्या है. महिलाओं के अधिकारों की वकालत करना या हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए उनका बहाना बनाना? महिलाओं के अधिकारों पर कांग्रेस की बातें खोखली लगती हैं जब उनके अपने रिकॉर्ड को देखा जाता है. उन्होंने शाह बानो फैसले के असर को पलटकर हमारी माताओं और बहनों के साथ धोखा किया.’

असम के सीएम ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में सत्ता से चिपके रहने के लिए राहुल गांधी की पार्टी ने यह सुनिश्चित किया कि राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह न मिले। उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी के लिए एक सीधी चुनौती है, अगर महिला समानता वास्तव में राजनीति से ऊपर है तो क्या वह ऐसे समान नागरिक संहिता का स्पष्ट रूप से समर्थन करेंगे, जो धर्म से परे समान अधिकारों की गारंटी देती है? या फिर ‘महिला अधिकारों’ का उनका विचार हिंदू धर्म पर हमला करने तक ही सीमित रहेगा?’

पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं का अपना अस्तित्व है और उनकी पहचान को उनके पिता, पति या बेटों के अधीन नहीं रखा जाना चाहिए. उन्होंने मनुस्मृति के उस नियम को शर्मनाक बताया, जिसके अनुसार महिला को जीवन के हर चरण में पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रहना चाहिए.

राहुल गांधी ने कहा, ‘भारत की सबसे बड़ी ताकत यहां की 70 करोड़ महिलाओं की अनोखी यात्राएं, अनोखी कल्पनाएं और अनोखे सपने हैं. मैं यहां मनुस्मृति का जिक्र करना चाहूंगा, जिसमें साफ कहा गया है कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन रहना चाहिए, जवानी में वह अपने पति के अधीन होती है और जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने बेटों के अधीन होती है. महिला को कभी भी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए. ये शब्द शर्मनाक हैं. ये शब्द नहीं कहे जाने चाहिए.’



Source


Share

Related post

UP CM Yogi Adityanath vs Congress over ‘fish…

Share Yogi calls out Ajay Rai, Congress says ‘diverting issues’ NEW DELHI: A political row erupted between the…
संसद में आने वाला है महिला आरक्षण-परिसीमन बिल? जानिए क्यों बढ़ी आहट

संसद में आने वाला है महिला आरक्षण-परिसीमन बिल?…

Share सरकार एक बार फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन बिल सदन में लाने वाली है? इस तरह…
‘Women Don’t Need To Prove Anything To Anyone’: Rahul Gandhi At Chhatron Ki Goonj Event In Pune

‘Women Don’t Need To Prove Anything To Anyone’:…

Share News india ‘Women Don’t Need To Prove Anything To Anyone’: Rahul Gandhi At Chhatron Ki Goonj Event…