- October 1, 2026
पैनकार्ड क्लब्स पर ED की बड़ी कार्रवाई, 646.58 करोड़ की 211 अचल संपत्तियां अटैच
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल ऑफिस-I ने पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 646.58 करोड़ रुपये की करीब 211 अचल संपत्तियां प्रोविजनली अटैच की हैं. यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत की गई है.
ED के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों में कमर्शियल ऑफिस स्पेस, लग्जरी होटल, ऑपरेशनल रिसॉर्ट, कृषि भूमि और रिहायशी संपत्तियां शामिल हैं. ये संपत्तियां महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और दादरा एवं नगर हवेली में स्थित हैं.
इन संपत्तियों के मालिकाना हक पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड (PCL), पैनोर्मिक यूनिवर्सल लिमिटेड और उनकी विभिन्न सब्सिडियरी कंपनियों, परिवार के सदस्यों और लाभार्थी मालिकों के नाम पर बताए गए हैं. ED ने यह जांच मुंबई के दादर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी. बाद में यह मामला मुंबई पुलिस की EOW को ट्रांसफर किया गया. EOW ने 31 दिसंबर 2021 को मुंबई की स्पेशल MPID कोर्ट के सामने चार्जशीट दाखिल की थी.
46 कंपनियों का नेटवर्क बनाकर Ponzi Scheme चलाने का आरोप
ED की जांच में सामने आया कि इस मामले से जुड़े लोगों ने पैनोर्मिक यूनिवर्सल लिमिटेड के तहत 46 कॉरपोरेट कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया था. आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए “Sale of Room Nights” और टाइमशेयर हॉलिडे मेंबरशिप की आड़ में अवैध पोंजी स्कीम (Ponzi Scheme) चलाई गई. ED के अनुसार, इस स्कीम के जरिए देशभर के 51 लाख से ज्यादा निवेशकों को अवास्तविक रिटर्न का भरोसा देकर निवेश के लिए आकर्षित किया गया.
जांच के मुताबिक, 1997-98 से 2017-18 के बीच पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड ने निवेशकों से करीब 9,577 करोड़ रुपये जुटाए. इसमें से करीब 2,858 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस किए गए, जबकि 2,332 करोड़ रुपये एजेंट कमीशन के तौर पर दिए गए. ED के मुताबिक, बाकी 4,387 करोड़ रुपये अपराध से हासिल रकम थी, जिसे आरोपियों और प्रमुख लोगों ने अपने पास रखा और अलग-अलग जगह डायवर्ट किया.
शेल कंपनियों के जरिए रकम की लेयरिंग का आरोप
ED की जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर अवैध रकम को शगुन ट्रैडलिंक्स लिमिटेड समेत कई शेल और डमी कंपनियों के जरिए लेयर किया गया. इसके बाद इस रकम को पैनोर्मिक यूनिवर्सल लिमिटेड और उसकी भारत तथा विदेश स्थित सब्सिडियरी कंपनियों में लगाया गया.
ED के मुताबिक, इसी रकम से भारत और विदेशों में महंगी रियल एस्टेट प्रॉपर्टी, रिसॉर्ट और कमर्शियल यूनिट्स खरीदी गईं. इन संपत्तियों को ग्रुप कंपनियों, डायरेक्टर्स और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर रखा गया और कथित तौर पर इन्हें वैध संपत्ति के तौर पर पेश किया गया.
मृत डायरेक्टर के नाम से फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन का आरोप
जांच के दौरान ED को यह भी पता चला कि पहले से SEBI और MPID अथॉरिटी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को कथित तौर पर बेचकर कानूनी कार्रवाई को विफल करने की कोशिश की गई. ED के मुताबिक, पनवेल के कल्हे गांव, रायगढ़ में 7.08 हेक्टेयर जमीन को SEBI और MPID कंपीटेंट अथॉरिटी के अटैचमेंट आदेशों के बावजूद कथित तौर पर अवैध तरीके से बेच दिया गया.
इस ट्रांजैक्शन में कथित तौर पर एक फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन का इस्तेमाल किया गया, जिस पर उस समय तक मृत हो चुकी डायरेक्टर उषा अरुण तारी के हस्ताक्षर बताए गए हैं. उषा अरुण तारी का 11 सितंबर 2018 को निधन हो चुका था. ED के अनुसार, यह कार्रवाई एक ऐसी कंपनी की ओर से की गई थी जिसे पहले ही struck-off किया जा चुका था. संपत्तियों के आगे अवैध ट्रांसफर या बिक्री को रोकने के लिए ED ने PMLA की धारा 5(1) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट की कार्रवाई की.
पहले विदेशों में 54.31 करोड़ की संपत्तियां भी अटैच की थीं
ED ने इससे पहले 2025 में अमेरिका, UAE और थाईलैंड में स्थित 30 अचल संपत्तियों को भी अटैच किया था. इनकी कीमत करीब 54.31 करोड़ रुपये बताई गई थी. ये संपत्तियां पैनोर्मिक यूनिवर्सल लिमिटेड की विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों और दिवंगत सुधीर मोरवेकर से संबंधित बताई गई थीं. इस अटैचमेंट को 9 अक्टूबर 2025 को PMLA Adjudicating Authority ने कन्फर्म किया था. ED के मुताबिक, इस मामले में अब तक PMLA के तहत कुल करीब 700.89 करोड़ रुपये की Proceeds of Crime से जुड़ी संपत्तियां प्रोविजनली अटैच की जा चुकी हैं. मामले में ED की आगे की जांच जारी है.