• April 14, 2026

देश के रोजगार पर पड़ रहा पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग का असर,लॉन्ड्री वालों ने भी बढ़ाए दाम

देश के रोजगार पर पड़ रहा पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग का असर,लॉन्ड्री वालों ने भी बढ़ाए दाम
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Iran Israel War: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग का असर देश के रोजगार पर पड़ रहा है. इनमें सड़क किनारे टेबल लगाकर प्रेस करने वाले लोग शामिल हैं. इनके अलावा बिजली से चलने वाली प्रेस के अलावा सेंट्रल दिल्ली में कोयले और LPG से प्रेस करवाना, अब महंगा हो गया है. पहले जहां एक जोड़ा कपड़े प्रेस करने का दाम 10 रुपए था, उसे अब बढ़ाकर 15 रुपए कर दिया गया है.

वजह है LPG गैस और कोयले के दाम का बढ़ जाना. जंग से पहले जहां 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का दम 1800 रुपए हुआ करता था, अब वही सिलेंडर 2000 रुपए के ऊपर मिल रहा है. दिल्ली की बंगाली मार्केट में पास पिछले 15 सालों से प्रेस की दुकान चलने वाली महिला ( नाम बताया है) ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि पहले 10 रुपए प्रति जोड़ी कपड़े हम लेते थे, लेकिन अब 15 रुपए प्रति जोड़े कर दिए हैं. गैस के दाम बढ़ गए हैं. ग्राहक भी ये बात समझते हैं तो उनकी तरफ से भी शिकायत नहीं हो रही है.

40 सालों से प्रेस करने का काम करे, पहले 10 रुपए कपड़े तक लेते थे

वहीं दूसरी तरफ कोयले से चलने वाली प्रेस करने वाले व्यक्ति ( नाम बताया है) ने बताया कि पिछले 40 सालों से ये प्रेस करने का काम कर रहें हैं. कुछ दिनों पहले तक 10 रुपए एक कपड़े के लेते थे लेकिन अब 15 रुपए करने पड़े हैं. कोयले के दाम में इजाफा हो गया है. पहले जहां 450 रुपए में 10 किलो कोयला मिलता था. वहीं अब 600 रुपए में 10 किलो मिलता है जिसकी वजह से दाम बढ़ाना पड़ रहा है. हालांकि कपड़े धुलने वाले धोबियों की शिकायत दूसरी है. इनका कहना है कि जंग की वजह से इनका कॉस्ट दोगुना हो गया है. कस्टमर की तरफ से पैसे नहीं बढ़ाए जा रहें हैं. 

लुटियंस दिल्ली के महादेव रोड पर कपड़े धुलने वाली साइट पर काम करने वाले ने बताया कि जंग से पहले कपड़े धुलने वाले केमिकल 450 रूपये प्रति गैलन मिलते थे. आज वही गैलन 850 रूपये में मिल रहा है. यानी पहले जहां एक कपड़े को धुलने में 13 रूपये की लागत आती थी तो हम इसे 15 रुपए प्रति कपड़े की धुलाई के तौर कर चार्ज करते थे. 

22 से 23 रुपये प्रति कपड़े धुलाई की आ रही लागत

अब केमिकल के दाम बढ़ जाने के बाद 22 से 23 रुपए प्रति कपड़े की धुलाई की लागत आ रही है, यानि कि हमें कम से कम 25 रुपए प्रति कपड़े मिलने चाहिए लेकिन कस्टमर हमारे पैसे ही बढ़ाने को राजी को नहीं है. अभी भी हमें 15 दुआएं प्रति कपड़े की दर से ही कपड़े धुल कर देने पड़ रहें हैं. इनका कहना है कि यहां हमारे पास सांसद, मंत्री और अधिकारियों की कोठी से कपड़े आते हैं लेकिन जब हम उनसे दाम बढ़ाने की बात करते हैं, तो वे कहते हैं कि इसी रेट पर कपड़े धुलने है, तो धुलो, नहीं तो हम किसी और से धुला लेंगे इसीलिए हमे अब मजबूरी में नुकसान उठाकर कपड़े धुलने पड़ रहें हैं.

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