• May 30, 2026

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल से क्यों घबराया तुर्की? ग्रीस संग डील की चर्चा से टेंशन में एर्दोगन, एक

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल से क्यों घबराया तुर्की? ग्रीस संग डील की चर्चा से टेंशन में एर्दोगन, एक
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भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को लेकर तुर्की में चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है. रिपोर्ट्स हैं कि ग्रीस और साइप्रस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन इस संभावना ने तुर्की के रणनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों को परेशान कर दिया है. उनका मानना है कि अगर ग्रीस को ब्रह्मोस मिल जाती है तो पूर्वी भूमध्यसागर (ईस्टर्न मेडिटेरेनियन) में सैन्य ताकत का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है.

तुर्की के रक्षा विशेषज्ञ ने क्या कहा?
तुर्की के जाने-माने रक्षा विश्लेषक अर्दान ज़ेंटर्क ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर ग्रीस के पास भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल आ गई तो पूरे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल जाएगा. उनके मुताबिक ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी लगभग मैक 3 की रफ्तार, बेहद सटीक निशाना साधने की क्षमता, कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता और जमीन, समुद्र तथा हवा से लॉन्च किए जाने की सुविधा है.

ब्रह्मोस को लेकर तुर्की क्यों चिंतित है?
idrw.org की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों को खास तौर पर इस बात की चिंता है कि साइप्रस ग्रीस तक ब्रह्मोस पहुंचाने में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है. हाल के वर्षों में भारत, ग्रीस और साइप्रस के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है. तुर्की का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में ब्रह्मोस जैसी लंबी दूरी तक मार करने वाली और अत्याधुनिक मिसाइल तैनात होती है, तो उसके सैन्य ठिकानों और नौसैनिक अभियानों पर सीधा असर पड़ सकता है.

कितनी ताकतवर है ब्रह्मोस मिसाइल?
ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई दुनिया की सबसे शक्तिशाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है. यह मिसाइल दुश्मन के जहाजों और जमीनी ठिकानों को निशाना बना सकती है. इसकी तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के कारण इसे रोकना बेहद मुश्किल माना जाता है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह तुर्की के रूसी निर्मित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.

भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात से बढ़ी चिंता
तुर्की की चिंता सिर्फ ब्रह्मोस तक सीमित नहीं है. भारत पहले ही तुर्की के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट सिस्टम, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और ATAGS तोप जैसी रक्षा प्रणालियां निर्यात कर चुका है. इसके अलावा भारत के ग्रीस और साइप्रस के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों को भी तुर्की अपने नजरिए से देख रहा है.

क्या ग्रीस और साइप्रस को ब्रह्मोस मिलेगा?
फिलहाल भारत सरकार ने ग्रीस या साइप्रस को ब्रह्मोस बेचने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. हालांकि हाल के महीनों में दोनों देशों के साथ उच्चस्तरीय बैठकों और रक्षा सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं. इसी वजह से संभावित ब्रह्मोस डील को लेकर अटकलें लगातार बढ़ रही हैं.

भारत को क्या होगा फायदा?
भारत लंबे समय से अपने रक्षा निर्यात को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी और युद्ध में प्रभावी साबित हुई प्रणालियों को दूसरे देशों को बेचकर भारत न सिर्फ अपनी रक्षा उद्योग को मजबूत करना चाहता है, बल्कि नए रणनीतिक साझेदार भी बनाना चाहता है. भारत पहले ही फिलीपीन्स को ब्रह्मोस निर्यात कर चुका है और कई अन्य देश भी इस मिसाइल में रुचि दिखा रहे हैं.

बदल रही है भारत की वैश्विक भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि तेजी से एक बड़े रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है. यही वजह है कि दक्षिण एशिया से हजारों किलोमीटर दूर यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र में भी भारतीय हथियारों की चर्चा हो रही है.



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