- September 26, 2026
‘रजिस्ट्रेशन कैंप से मामले को दबाने की फिराक में ECI’, कांग्रेस का बड़ा आरोप
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कांग्रेस ने फिर मांग की।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर Gen-Z युवाओं को जानबूझकर वोटिंग अधिकार से दूर रखने का आरोप लगाया है. पार्टी ने कहा कि अब चुनाव आयोग ‘यूथ रजिस्ट्रेशन कैंप’ के जरिए अपनी गलती को छिपाने की कोशिश कर रहा है. कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार Gen-Z से डरती है, इसलिए SSR के दौरान युवा मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को रोक दिया गया. इसके अलावा, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और उन्हें ‘सरकारी गवाह’ बनने की बात कही.
कांग्रेस ने पहली बार वोट करने वाले युवाओं के लिए ECI की तरफ से आयोजित किए जा रहे यूथ रजिस्ट्रेशन कैंप्स को दिखावा करार दिया. पार्टी ने कहा कि पहली बार वोट करने वाले वोटरों के नाम मतदाता सूची से बाहर रखने और उन्हें वोटिंग राइट्स से वंचित करने के लिए आयोग ही जिम्मेदार है.
युवाओं का नाम वोटर लिस्ट दो सालों से शामिल नहीं किया जा रहा- नायक
नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में शनिवार (26 सितंबर, 2026) को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक बसोया ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी सरकार Gen Z की राजनीतिक चेतना से डरी हुई है और इसी वजह से पिछले दो सालों से नए युवा वोटरों के रजिस्ट्रेशन को रोक दिया गया है. उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान देश में पहली बार वोट करने वाले युवाओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए कोई स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) नहीं कराया गया.
उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर SSR की वैधानिक प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया और कहा कि इस प्रक्रिया के तहत 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नागरिकों को वोटर के रूप में रजिस्टर किया जाता है, लेकिन 2024 से इसे रोक दिया गया है. इससे युवाओं को अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने का मौका नहीं मिला. उन्होंने कहा, ‘यह मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग अब अपनी साख बचाने और देरी को छिपाने की कोशिश में जल्दबाजी में युवाओं के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन कैंप्स लगा रहा है.’
फॉर्म 6A को लेकर क्या बोलीं कांग्रेस प्रवक्ता?
डॉ. रागिनी ने फॉर्म 6A में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जुलाई महीने में एक नई अत्यंत जरूरी शर्त जोड़ी गई, जिसके तहत पहली बार वोट करने वाले युवाओं को यह जानकारी देनी होगी कि पिछले SIR के दौरान उनके माता-पिता या दादा-दादी का रजिस्ट्रेशन कहां हुआ था. उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा बदलाव RP एक्ट, 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर रूल्स, 1960 के तहत चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है.
उन्होंने कहा कि इस तरह के नियमों में बदलाव सिर्फ केंद्र सरकार ही संसद को बताने के बाद कर सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने भी इस बदलाव को लेकर लिखित रूप से आपत्ति जताई थी और इसे अवैध और अनधिकृत करार दिया था.
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक बसोया ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार न सिर्फ मोदी सरकार के इशारे पर वोट चोरी को आसान बना रहे हैं, बल्कि वे Gen Z वोटरों के वोटिंग के अधिकार में हेरफेर में भी शामिल हैं. उन्होंने कहा, ‘अब ज्ञानेश कुमार के पास सिर्फ दो ही ऑप्शन हैं. पहला वो इस्तीफा दें या जैसा कि राहुल गांधी ने सुझाव दिया है कि सरकारी गवाह बनें और बताएं कि वोट चोरी के पीछे असली साजिशकर्ता कौन है?’
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