• August 2, 2025

अमेरिका या रूस, समंदर में किसकी चलेगी बादशाहत? जानें किसकी सबमरीन कितनी ताकतवर

अमेरिका या रूस, समंदर में किसकी चलेगी बादशाहत? जानें किसकी सबमरीन कितनी ताकतवर
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रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘डेड इकॉनॉमी’ वाली टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देने के बाद, अमेरिका ने अपनी दो परमाणु पनडुब्बियों को रणनीतिक स्थानों की ओर भेजने का आदेश दिया है. यह कदम शीत युद्ध काल में अपनाई जाने वाली पुरानी सैन्य रणनीति की याद दिलाता है.

ट्रंप ने यह फैसला तब लिया जब उनके टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकियों का रूस पर कोई विशेष असर नहीं पड़ा. अमेरिका और रूस के बीच अब जंग जमीन पर नहीं, समंदर की गहराइयों में दिख रही है. दोनों देशों ने अपनी-अपनी परमाणु पनडुब्बियां तैनात कर दी हैं. सवाल ये उठता है, कौन है ज्यादा ताकतवर? आइए जानते हैं किस देश की सबमरीन है ज्यादा खतरनाक और आधुनिक.

‘डेड हैंड’ क्या है?
‘डेड हैंड’ प्रणाली एक स्वचालित या अर्ध-स्वचालित परमाणु हथियार नियंत्रण तंत्र है, जो शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ द्वारा विकसित किया गया था. यह प्रणाली इस तरह से डिजाइन की गई है कि यदि देश का पूरा नेतृत्व किसी परमाणु हमले में नष्ट हो जाए, तब भी यह प्रणाली एक व्यापक परमाणु पलटवार कर सकती है. मेदवेदेव द्वारा इस प्रणाली की याद दिलाए जाने के बाद अमेरिका की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई.

 रूस की तीखी प्रतिक्रिया
हालांकि, रूस की सरकार यानी क्रेमलिन की तरफ से इस अमेरिकी फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस के एक वरिष्ठ सांसद विक्टर वोडोलात्सकी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि उसने कोई बड़ा सैन्य कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि रूस की परमाणु पनडुब्बियों की संख्या अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक है और अमेरिका की जिन पनडुब्बियों को रूस के नजदीक भेजा गया है, उन पर पहले से ही रूस की नजर है और वे उसकी निगरानी में हैं.

अमेरिका की परमाणु पनडुब्बी क्षमता

ओहायो-क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां

अमेरिकी नौसेना के पास ओहायो-क्लास की कम से कम 14 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBNs) हैं, जिन्हें ‘बूमर्स’ कहा जाता है. इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी स्टेल्थ और परमाणु हथियारों को सटीकता से पहुंचाने की क्षमता है. ये पनडुब्बियां लंबी अवधि के लिए गश्त करने में सक्षम हैं और 15 वर्षों तक किसी बड़े ओवरहॉल की ज़रूरत नहीं होती. हर पनडुब्बी में अधिकतम 20 सबमरीन लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBM) तैनात की जा सकती हैं. इनका मुख्य हथियार Trident II D5 मिसाइल है.

अमेरिकी फास्ट अटैक पनडुब्बियां

वर्जीनिया-क्लास
अमेरिका के पास वर्जीनिया-क्लास की 24 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन हैं, जिनमें USS Hawaii, USS Missouri, और USS North Carolina जैसी पनडुब्बियां शामिल हैं. यह अमेरिका की सबसे नई अंडरसी वॉरफेयर तकनीक पर आधारित हैं. इनमें विशेष रूप से स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज के मिशनों को समर्थन देने के लिए सुविधाएं होती हैं. इनमें गोताखोरों के लिए ‘लॉक-इन/लॉक-आउट चेंबर’ भी होता है. इन पनडुब्बियों में टॉमहॉक और हार्पून मिसाइलें, साथ ही MK-48 टॉरपीडो से लैस किया गया है.

सीवुल्फ-क्लास
सीवुल्फ-क्लास की कुल 3 पनडुब्बियां अमेरिकी नौसेना के बेड़े में शामिल हैं. पहली पनडुब्बी USS Seawolf को 1997 में शामिल किया गया था. ये पनडुब्बियां वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण) से रहित हैं लेकिन इनमें आठ टॉरपीडो ट्यूब होते हैं और इनका टॉरपीडो कक्ष 50 हथियार रखने में सक्षम होता है.

लॉस एंजेलिस-क्लास (688-क्लास)

लॉस एंजेलिस-क्लास पनडुब्बियां अमेरिका की सबमरीन फोर्स की रीढ़ हैं. इनमें से कम से कम 24 पनडुब्बियां सेवा में हैं. इनका निर्माण 1976 में शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ का मुकाबला करने के उद्देश्य से किया गया था. ये पनडुब्बियां तेज रफ्तार, स्टेल्थ तकनीक, और गहरे समुद्र में युद्ध संचालन में अत्यंत प्रभावी साबित हुई हैं. धीरे-धीरे इनकी जगह वर्जीनिया-क्लास की पनडुब्बियां ले रही हैं.

रूस की परमाणु पनडुब्बी क्षमता

बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां:

बोरेई-क्लास
रूस के पास बोरेई-क्लास की 8 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBNs) हैं. हर पनडुब्बी में 16 बुलावा SLBM मिसाइलें और छह 533mm टॉरपीडो लॉन्चर लगे होते हैं. इसके अलावा ये पनडुब्बियां एंटी-सबमरीन रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें भी दाग सकती हैं. इनका दल सौ से अधिक नौसैनिकों का होता है. भविष्य में यही पनडुब्बियां रूस की सबसे उन्नत रणनीतिक नौसैनिक प्रणाली बनेंगी.

डेल्टा IV-क्लास
बोरेई-क्लास पनडुब्बियों के आने से पहले रूस की परमाणु ताकत का आधार डेल्टा IV-क्लास पनडुब्बियां थीं. यह श्रेणी टायफून-क्लास के साथ विकसित की गई थी. वर्तमान में इनमें से कम से कम 6 पनडुब्बियां सेवा में हैं. प्रत्येक में 16 सिनेवा SLBM मिसाइलें होती हैं और ये आज भी रूस की समुद्र आधारित परमाणु ताकत की रीढ़ बनी हुई हैं.

फास्ट अटैक पनडुब्बियां

यासेन-क्लास
रूस की नौसेना के पास यासेन-क्लास की 4 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन हैं. ये आकार में छोटी होती हैं और इनमें कम क्रू की जरूरत होती है. हर यासेन-क्लास सबमरीन या तो पांच 3M54-1 कैलिब्र मिसाइलें या चार P-800 ओनिक्स मिसाइलें लेकर चल सकती हैं. ये मिसाइलें लंबी दूरी से दुश्मन के जमीनी ठिकानों और जहाजों पर हमला करने में सक्षम हैं.

अकुला-क्लास
रूस की अकुला-क्लास पनडुब्बियों को ‘शार्क’ भी कहा जाता है, क्योंकि ‘अकुला’ का रूसी मतलब शार्क होता है. यह पनडुब्बी अमेरिका की लॉस एंजेलिस-क्लास का जवाब मानी जाती है. रूस के पास इस क्लास की लगभग पांच पनडुब्बियां सेवा में हैं. ये पनडुब्बियां बेहद शांत संचालन क्षमता के साथ दुश्मन के क्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं और इनसे कैलिब्र, ओनिक्स या ग्रेनिट मिसाइलें चलाई जा सकती हैं, साथ ही ये घातक टॉरपीडो से भी लैस होती हैं.



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