• May 5, 2026

ममता के साथ विपक्ष ने भी पकड़ा माथा, बंगाल में कैसे ढह गया TMC का किला? जानें अपने ही घर से कैस

ममता के साथ विपक्ष ने भी पकड़ा माथा, बंगाल में कैसे ढह गया TMC का किला? जानें अपने ही घर से कैस
Share

Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • ममता बनर्जी भवानीपुर सीट हारीं, शुभेंदु अधिकारी ने 15 हजार से अधिक वोटों से हराया।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह 15 साल के शासन के अंत का संकेत है।
  • ममता ने इसे बीजेपी की अनैतिक जीत, वोटों की लूट बताया, पर इस्तीफा नहीं देंगी।
  • भाजपा ने हिंदू वोटरों की गोलबंदी से मुस्लिम बहुल सीटों पर भी जीत दर्ज की।

तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी इस बार सिर्फ पश्चिम बंगाल का चुनाव नहीं हारीं, बल्कि वो उनका घर कही जाने वाली भवानीपुर विधानसभा सीट भी हार गईं और इस बार भी ममता के खिलाफ भाजपा की आवाज पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ही बने, जिन्होंने ही उन्हें 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया है. खास बात ये है कि शुभेंदु ने 2021 के चुनाव में भी नंदीग्राम में ममता को हराया था, लेकिन तब भवानीपुर ने ममता को राज्य का मुख्यमंत्री बनाए रखा था. पर इस बार पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐसी सुनामी आई, जिसमें ममता बनर्जी का भवानीपुर किला भी ढह गया.

जनता के जनादेश को मानने के लिए तैयार नहीं ममता बनर्जी

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भवानीपुर की हार सिर्फ एक सीट की हार नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक नरैटिव को बदलने का संदेश समेटे हुए है. संदेश ये कि पश्चिम बंगाल में दीदी के 15 साल के शासन का अंत हो गया है और पहली बार बंगाल में भगवा लहराने जा रहा है.

हालांकि, ममता बनर्जी इस हार को बीजेपी की अनैतिक जीत करार देते हुए वोटों की लूट बता रही हैं और उन्होंने यहां तक कह दिया है कि वो चुनाव हारी नहीं हैं, इसलिए वो इस्तीफा नहीं देंगी, लेकिन इस बीच सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने बंगाल की सियासी तस्वीर बदलकर रख दी. हार की इस कहानी में पश्चिम बंगाल के लिए ममता बनर्जी कैसे और क्यों बेगानी हो गईं?

बंगाल में ढह गया तृणमूल कांग्रेस का किला

सिर्फ ममता बनर्जी को ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष को इस बात पर अटूट विश्वास था कि अगर भाजपा से कोई सीधी टक्कर ले रहा है, तो वो ममता बनर्जी हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने ममता बनर्जी के साथ-साथ पूरे विपक्ष को करारा झटका दे दिया है. ममता बनर्जी पूरी ताकत के साथ भाजपा के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन इस बार वो बीजेपी को पश्चिम बंगाल का किला भेदने से रोक नहीं पाईं.

चुनाव नतीजे आने से पहले ही बीजेपी डंके की चोट पर ममता बनर्जी की विदाई का ऐलान कर रही थी. पहले चरण के बंपर मतदान के बाद तो अमित शाह का कॉन्फिडेंस और ज्यादा बढ़ गया था और जैसे ही नतीजों वाले दिन रिजल्ट टैली में बीजेपी का आंकड़ा बढ़ने लगा. TMC खेमे में सन्नाटा पसरने लगा. बीजेपी बहुमत की तरफ बढ़ रही थी, लेकिन ममता आखिरी नतीजा आने तक जीत का दावा कर रही थीं, लेकिन दोपहर ढलते-ढलते बंगाल में भगवा लहराने का जश्न मनाया जाने लगा था. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट के काउंटिंग सेंटर में पहुंच गई.

ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी की यह जीत धोखा है. उन्होंने मंगलवार (5 मई, 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बीजेपी की जीत को सवालों में खड़ा किया. उनका दावा है कि आधिकारिक रूप से भले ही बीजेपी जीत गई हो, लेकिन नैतिक रूप से वो ही बंगाल में जीती हैं, जबकि जानकार बता रहे हैं कि ममता बनर्जी को मुगालता हो गया कि वो बंगाल नहीं हारेंगी.

यह भी पढ़ेंः ‘हमें रावण जैसा नहीं बनना, हम राम के अनुयायी’, TMC ऑफिस में तोड़फोड़ के बीच सुकांता मजूमदार की BJP कार्यकर्ताओं को सलाह

भाजपा ने बंगाल में पलट दिया पूरा सियासी खेल

दरअसल, पिछले एक दशक से पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट लगातार कमजोर पड़ रहे थे और इसे भांपते हुए मोदी और अमित शाह ममता के खिलाफ मजबूत विकल्प बनने के लिए बंगाल में जी तोड़ कोशिश कर रहे थे. ध्रुवीकरण- ये शब्द हमेशा बीजेपी के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन बंगाल में ध्रुवीकरण ऐसा पलटा कि सियासी खेल ही बदल गया. ममता बनर्जी को बीजेपी मुस्लिमों की पार्टी बताती रही है. हिंदुओं को अपने हक में करने के लिए बीजेपी ने ये दांव चला था और दांव ऐसा काम किया कि इस बार बंगाल में ममता मुस्लिम बहुल इलाके की सीट भी नहीं बचा पाईं.

हिंदू वोटरों की गोलबंदी का ही नतीजा है कि बाकुरा, पूर्वी मेदनापुर, पुरुलिया, बर्धमान जैसे बड़े जिलों में टीएमसी का स्कोर जीरो हो गया. वहीं, मुर्शिदाबाद, मालदा, बीरभूम और उत्तर दिनाजपुर समेत बंगाल के मुस्लिम बहुल 9 जिलों में टीएमसी अपना प्रदर्शन रिपीट नहीं कर पाई, क्योंकि हिंदू वोट एकजुट था और मुस्लिम वोट बंटा हुआ था. फिर नतीजा यह हुआ कि मुस्लिम बहुल 160 सीटों में से पिछली बार 129 पर जीतने वाली ममता बनर्जी महज 67 पर सिमट गई, जबकि बीजेपी ने 160 में से 86 सीटें जीती. पिछली बार महज 30 सीटें ही इस इलाके में बीजेपी को मिली थी.

ममता के 66 फीसदी मंत्री नहीं बचा पाए अपनी सीट

बंगाल में बीजेपी का बवंडर ऐसा चला कि बिजली मंत्री से लेकर वित्त मंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री से लेकर श्रम और परिवहन मंत्री तक कोई अपनी सीट नहीं बचा पाए. ममता के 66 फीसदी मंत्रियों ने अपनी सीट गंवा दी. ये आंकड़ा इस बात पर मुहर लगाता है कि ममता के खिलाफ बंगाल की जमीन पर विरोध की चिंगारी धधक रही थी, जिसे बीजेपी ने आग में बदल दिया. बंगाल का मन बदल रहा था. बंगाल दीदी से बीजेपी की तरफ देखने लगा था और इस बदलते हुए मन की टोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने ले ली थी.

यह भी पढ़ेंः जब बंगाल पुलिस ने राइटर्स बिल्डिंग से ममता बनर्जी को फेंक दिया था बाहर, अब इस्तीफा देने से किया इनकार



Source


Share

Related post

19, 20, now 22? Pressure mounts on Mamata Banerjee as rebel MP tally climbs; BJP meets dissidents

19, 20, now 22? Pressure mounts on Mamata…

Share NEW DELHI: Trouble mounted for Trinamool Congree chief Mamata Banerjee as rebel MP Kakoli Ghosh Dastidar on…
दीदी के हाथ से गई TMC? भूपेन्द्र यादव के घर बागी सांसदों की बैठक, काकोली बोलीं- कल स्पीकर से कर

दीदी के हाथ से गई TMC? भूपेन्द्र यादव…

Share Show Quick Read Key points generated by AI, verified by newsroom तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसद बागी…
TMC lurches from crisis to crisis: Mamata’s party battles for survival as rebel MPs move to stake claim

TMC lurches from crisis to crisis: Mamata’s party…

Share TMC chief Mamata Banerjee NEW DELHI: From the Mamata Banerjee-led TMC shifting its Delhi operations from the…