• September 11, 2026

BRICS में मोदी-पुतिन-जिनपिंग से ट्रंप को मिर्ची! क्या फिर बढ़ेंगे टैरिफ?

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12-13 सितंबर को दिल्ली में BRICS समिट में प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ मंच पर होंगे. यह तीनों नेता जब एक साथ दिखेंगे, तो सबकी निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर होंगी. लेकिन सवाल यह है कि ट्रंप इस तिकड़ी को कैसे देखेंगे और क्या पहले की तरह फिर से टैरिफ बढ़ा देंगे…

ट्रंप पहले ही बढ़ा चुके हैं टैरिफ, अब क्या होगा?

ट्रंप ने 2025 में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और रूसी तेल खरीदने पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत की पेनल्टी भी लगाई थी. यानी कुल मिलाकर भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लग गया था. फिर फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ, जिसमें टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया. अगस्त 2026 में ट्रंप ने फिर से टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदता रहा.

अब सबसे बड़ी बात यह है कि ट्रंप ने अगस्त 2026 में ही साफ ऐलान कर दिया था कि जो भी देश BRICS की ‘अमेरिका विरोधी नीतियों’ का समर्थन करेगा, उस पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ लगेगा.

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा था, ‘इस नीति में कोई अपवाद नहीं होगा.’ साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर BRICS देश डॉलर को बदलने के लिए कोई नई करेंसी लाने की कोशिश करेंगे, तो उन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा.

दिल्ली में होने वाली मुलाकात को ट्रंप कैसे देखेंगे?

BRICS समिट में मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात को ट्रंप बहुत ध्यान से देख रहे हैं. पिछले साल चीन के तियानजिन में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में तीनों नेताओं की जो तस्वीरें वायरल हुई थीं, वो ट्रंप को अब भी याद होंगी. ट्रंप के पूर्व सलाहकार जॉन बोल्टन भी मानते हैं कि ट्रंप BRICS पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब BRICS के सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करेगा कि दिल्ली में क्या-क्या फैसले लिए जाते हैं. अगर समिट में सिर्फ बातचीत होती है और कोई ठोस ऐलान नहीं होता, तो ट्रंप शायद ज्यादा नाराज नहीं होंगे.

अगर मोदी, पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती की तस्वीरें दुनिया देखती है और साथ में व्यापार, पेमेंट सिस्टम या ऊर्जा पर कोई बड़ा ऐलान होता है, तो ट्रंप की नाराजगी बढ़ सकती है.

क्या ट्रंप फिर बढ़ाएंगे टैरिफ?

एक्सपर्ट्स ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने की 3 बड़ी वजहें बताते हैं:

  • डॉलर की चिंता: ट्रंप को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि BRICS देश डॉलर को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. BRICS में लोकल करेंसी में व्यापार बढ़ाने की बात हो रही है. भारत और रूस के बीच व्यापार अब डॉलर के बाहर भी हो रहा है. अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स तो यहां तक कह चुके हैं कि ट्रंप की धमकियां उलटा असर कर रही हैं और BRICS देशों को डॉलर छोड़ने के लिए मजबूर कर रही हैं. तो अगर समिट में लोकल करेंसी या पेमेंट सिस्टम पर कोई बड़ा फैसला हुआ, तो ट्रंप टैरिफ बढ़ा सकते हैं.
  • रूस से तेल खरीद: भारत लगातार रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है. ट्रंप ने पहले ही इस वजह से भारत पर टैरिफ बढ़ाया था. अगर समिट में मोदी और पुतिन के बीच ऊर्जा पर कोई नया समझौता हुआ, तो ट्रंप फिर से टैरिफ बढ़ाने का बहाना ढूंढ सकते हैं.
  • अमेरिकी कांग्रेस का दबाव: अमेरिकी कांग्रेस में एक बिल आया है, ‘सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’. इसमें ट्रंप को भारत जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है. हालांकि, अमेरिकी कारोबारी संगठनों ने इसका विरोध किया है और कहा है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भार पड़ेगा. अगर ट्रंप चाहें, तो वो इस बिल का इस्तेमाल करके भारत पर और टैरिफ लगा सकते हैं.

लेकिन भारत ने भी अपनी चाल चली है…

भारत ने समिट से पहले ही साफ कर दिया है कि वो BRICS को अमेरिका विरोधी मंच नहीं बनने देगा. भारत ने कहा है कि BRICS ‘गैर-पश्चिमी’ है, ‘पश्चिम विरोधी’ नहीं. विदेश मंत्रालय के पूर्व अधिकारी श्रीकुमार मेनन के मुताबिक, ट्रंप की टैरिफ धमकियों की वजह से भारत समिट में ‘सतर्क भाषा’ इस्तेमाल करेगा, लेकिन अपना एजेंडा नहीं बदलेगा. भारत ने साफ कर दिया है कि वो कोई साझा BRICS करेंसी नहीं चाहता, बल्कि लोकल करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देना चाहता है, ताकि अमेरिका की नाराजगी न बढ़े.

इसके अलावा, भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की बातचीत भी कर रहा है. जून 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति की थी. तो भारत की कोशिश है कि ट्रंप को नाराज किए बिना BRICS में अपनी भूमिका निभाई जाए.

तो क्या भारत को टैरिफ बढ़ने का खतरा नहीं?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर दिल्ली समिट में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती की तस्वीरें दुनिया भर में वायरल होती हैं और साथ में व्यापार, पेमेंट सिस्टम या ऊर्जा पर कोई ठोस ऐलान होता है, तो ट्रंप की नाराजगी बढ़ना तय है. ट्रंप पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुके हैं. BRICS देशों को 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दे चुके हैं. अगर उन्हें लगा कि भारत, रूस और चीन मिलकर अमेरिका के खिलाफ मोर्चा बना रहे हैं, तो वो फिर से टैरिफ बढ़ा सकते हैं.

भारत न साझा BRICS करेंसी चाहता है, न अमेरिका विरोधी मोर्चा. भारत की कोशिश है कि BRICS में रहते हुए भी अमेरिका के साथ रिश्ते न बिगड़ें. यही भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती है. एक तरफ पुतिन और जिनपिंग के साथ दोस्ती, दूसरी तरफ ट्रंप को नाराज किए बिना व्यापार समझौता.



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