• May 17, 2026

भारत ने खारिज किया सिंधु जल संधि पर इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला, पाकिस्तान को फिर दी ये चेतावनी

भारत ने खारिज किया सिंधु जल संधि पर इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला, पाकिस्तान को फिर दी ये चेतावनी
Share

Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर हेग स्थित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) के ताजा फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है. भारत ने साफ कहा है कि यह अदालत अवैध तरीके से गठित की गई है और इसका कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है. इसलिए इसके किसी भी फैसले, आदेश या कार्रवाई को भारत मान्यता नहीं देता. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि अवैध रूप से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 15 मई 2026 को सिंधु जल संधि के तहत अधिकतम जल भंडारण क्षमता (Maximum Pondage) से जुड़े मामले में एक तथाकथित फैसला जारी किया है.

उन्होंने कहा कि भारत इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, जैसे पहले दिए गए सभी फैसलों को खारिज किया गया था. भारत ने कभी भी इस अदालत के गठन को मान्यता नहीं दी. ऐसे में इस अदालत की किसी भी कार्यवाही, फैसले या आदेश का कोई कानूनी महत्व नहीं है और वह पूरी तरह नल एंड वॉयड यानी शून्य और अमान्य है.

सिंधु जल संधि स्थगित रखने का फैसला बरकरार

विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अब भी लागू है. भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को सिंधु नदी प्रणाली के जल उपयोग को लेकर यह संधि हुई थी. भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस संधि को स्थगित कर दिया था. भारत का कहना था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी.

भारत बोला- संप्रभु अधिकारों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं

विदेश मंत्रालय ने जून 2025 में भी स्पष्ट कहा था कि जब तक संधि स्थगित है, तब तक भारत इस समझौते के तहत किसी भी दायित्व को निभाने के लिए बाध्य नहीं है. भारत ने कहा कि कोई भी कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन, खासकर ऐसा अवैध रूप से गठित निकाय, भारत के संप्रभु अधिकारों के तहत उठाए गए कदमों की वैधता पर सवाल नहीं उठा सकता.

 

 

किशनगंगा और रतले परियोजनाओं को लेकर भी उठा था विवाद

पिछले साल भी विदेश मंत्रालय ने तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की आलोचना की थी, जब उसने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर अपने अधिकार क्षेत्र पर “सप्लीमेंटल अवॉर्ड” जारी किया था. भारत ने उस समय भी कहा था कि उसने कभी इस तथाकथित अदालत के कानूनी अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया. भारत के मुताबिक, इस मध्यस्थता निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है और इसके तहत की गई सभी कार्यवाहियां और फैसले अवैध हैं.

ये भी पढ़ें: Trivandrum Rajdhani Train: त्रिवेंद्रम से निजामुद्दीन आ रही राजधानी एक्सप्रेस के कोच में लगी आग, यात्रियों को उतारा गया

पाकिस्तान पर लगाया अंतरराष्ट्रीय मंचों के दुरुपयोग का आरोप

भारत ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस “फर्जी मध्यस्थता प्रक्रिया” का सहारा लेना उसकी लंबे समय से चली आ रही धोखाधड़ी और अंतरराष्ट्रीय मंचों के दुरुपयोग की नीति का हिस्सा है. भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ऐसे कदमों के जरिए आतंकवाद के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है.



Source


Share

Related post

Nitin Nabin discusses digital public infrastructure, clean energy with envoys of 23 EU countries

Nitin Nabin discusses digital public infrastructure, clean energy…

Share Nitin Nabin discusses digital public infrastructure, clean energy with envoys of 23 EU countries (Image/ANI) NEW DELHI:…
PoK man caught near LoC

PoK man caught near LoC

Share JAMMU: Alert Army troops Friday apprehended a PoK resident near LoC in Poonch district, sources said.“A man…
अफगानिस्तान की मार से घूमा पाकिस्तान का दिमाग! बौखलाए ख्वाजा आसिफ ने भारत पर लगा दिए झूठे आरोप

अफगानिस्तान की मार से घूमा पाकिस्तान का दिमाग!…

Share पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान से हुए ड्रोन हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार…