• June 11, 2026

78 साल पुराना सपना हुआ साकार, जोजीला टनल से बदलेगी लद्दाख की तस्वीर, जानें कैसे…

78 साल पुराना सपना हुआ साकार, जोजीला टनल से बदलेगी लद्दाख की तस्वीर, जानें कैसे…
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लद्दाख को कश्मीर घाटी के जरिए देश और दुनिया से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ऐतिहासिक ‘जोजीला टनल’ (Zojila Tunnel) में खुदाई (ब्रेकथ्रू) का काम पूरा हो गया है. 9 जून 2026 को टनल की खुदाई पूरी होते ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई. लद्दाख के कारगिल के रहने वाले 78 वर्षीय गुलाम अब्बास भी उन चुनिंदा लोगों में शामिल रहे, जिन्हें इस अधूरी टनल के जरिए द्रास के मिनिमार्ग से कश्मीर घाटी के सोनमर्ग तक का 13.15 किलोमीटर का सफर तय करने का मौका मिला.

गुलाम अब्बास ने भावुक होते हुए बताया, “मेरे बाप-दादा ने भी यह सपना देखा था कि जोजीला दर्रे की कठिन चढ़ाई चढ़े बिना हम कश्मीर पहुंच जाएं. आज 78 साल बाद मेरा यह सपना पूरा हो गया है और मैं बेहद खुश हूं.”

समुद्र तल से 16,430 फीट की ऊंचाई पर स्थित जोजीला दर्रा बेहद जोखिम भरा मार्ग है, जहां हर साल 10 से 20 फीट तक भारी बर्फबारी होती है. सर्दियों में तापमान माइनस 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क जाने के कारण यहाँ अक्सर हिमस्खलन (Avalanche) होता है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है. इसके चलते दिसंबर से अप्रैल के बीच लद्दाख का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता था और आपातकालीन स्थितियों में लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था.

35 वर्षीय स्थानीय निवासी मोहम्मद यासीन ने बताया, “पहले जब सड़क बंद होती थी, तो हमें डर लगता था कि अगर कोई बीमार हो गया तो अस्पताल कैसे पहुंचेगा. लेकिन अब इस टनल के बन जाने से हम किसी भी समय इलाज के लिए श्रीनगर के अस्पताल पहुंच सकते हैं.”

इस टनल के बन जाने से लद्दाख और कश्मीर के पर्यटन उद्योग तथा स्थानीय कारोबार को एक नई उड़ान मिलने की उम्मीद है. सोनमर्ग में हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) की दुकान चलाने वाले अब्दुल मजीद और टूर गाइड फिरदौस अहमद के अनुसार, वर्ष 2025 में 5.5 किलोमीटर लंबी सोनमर्ग टनल के शुरू होने से इलाके में पर्यटन का स्वरूप पहले ही बदल चुका है. अब जोजीला टनल के चालू होने से दोनों तरफ सालभर पर्यटकों और व्यापारिक ट्रकों की आवाजाही जारी रहेगी. सोनमर्ग के घोड़ा चालक इरफान अहमद ने उम्मीद जताई कि पूरे साल काम मिलने से स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा और क्षेत्र का तेजी से विकास होगा.

टनल की वजह से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी सुधारेगी बल्कि शीतकालीन पर्यटन (विंटर टूरिज्म) के नए रास्ते भी खोलेगी. रूस के साइबेरिया के बाद दुनिया के सबसे ठंडे स्थान के रूप में मशहूर द्रास के निवासी मोहम्मद कासिम ने कहा, “जिस तरह लोग सर्दियों में बर्फबारी का मजा लेने गुलमर्ग और सोनमर्ग आते हैं, अब वे द्रास और कारगिल आकर भी स्कीइंग और स्नो मोबाइल जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद ले सकेंगे.”

गौरतलब है कि जनवरी 1995 में द्रास में न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया था. वर्ष 2012 में इस परियोजना की रूपरेखा बनने और 2018 तथा 2021 में नए सिरे से काम शुरू होने के बाद, अब टनल बोरिंग का काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है. अब स्थानीय लोगों और पर्यटकों को बस उस दिन का इंतजार है जब इसे पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया जाएगा.

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