- October 15, 2026
लद्दाख के नेताओं और MHA के बीच निर्वाचित निकाय पर आज बातचीत, विशेष मॉडल पर बनेगी सहमति!
अनुच्छेद 371(K) के तहत लद्दाख के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा उपायों के रोडमैप और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एक निर्वाचित निकाय के प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए, आज लेह में लद्दाख के नेताओं और गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों के बीच उप-समिति स्तर की बातचीत का एक नया दौर शुरू होगा.
शाम 4 बजे होने वाली इस उप-समिति स्तर की बैठक में लेह एपेक्स बॉडी (LAB), कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के नेता, लद्दाख के सांसद हाजी हनीफा जान और गृह मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे. यह बातचीत 9 सितंबर को नई दिल्ली में दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक के बाद हो रही है, जिसमें लद्दाख स्तर पर एक निर्वाचित निकाय और संविधान के अनुच्छेद 371 के विशेष प्रावधानों के तहत सुरक्षा उपायों पर सहमति बनी थी.
लद्दाख को मिलेगा नया निर्वाचित निकाय
LAB के सह-अध्यक्ष शेरिंग दोरजे ने पुष्टि की है कि बैठक इन्हीं दो बिंदुओं पर केंद्रित होगी. उन्होंने बताया कि पिछली बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एक निर्वाचित निकाय का प्रस्ताव रखा था. उन्होंने कहा, “हम 9 सितंबर की बैठक में गृह मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा उठाए गए कुछ बिंदुओं पर लिखित जवाब सौंपेंगे.”
दोरजे ने कहा कि लद्दाख के नेता संवैधानिक सुरक्षा उपायों के लिए केंद्र द्वारा प्रस्तावित ढांचे पर स्पष्टता चाहते हैं. उन्होंने कहा, “हम यह जानना चाहते हैं कि वे हमें किस तरह के संवैधानिक सुरक्षा उपाय देने की पेशकश कर रहे हैं.”
लद्दाख के नेता उपराज्यपाल की भूमिका पर चाहते हैं रोक
उन्होंने कहा कि लद्दाख के नेता प्रस्तावित निर्वाचित निकाय की शक्तियों और इस व्यवस्था के तहत उपराज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी मांगेंगे.
लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा हाल ही में लिए गए नीतिगत फैसलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक संवैधानिक सुरक्षा उपायों और निर्वाचित निकाय पर कोई फैसला नहीं हो जाता, “हम चाहते हैं कि वे कोई भी बड़ा फैसला न लें – जिसमें ‘नौटोर’ (Nautor) भूमि को नियमित करना, शराब की दुकानें खोलना और पर्यटन से जुड़े नीतिगत मामले शामिल हैं.”
उन्होंने कहा कि ये नीतिगत फैसले निर्वाचित निकाय के चुनाव के बाद नई सरकार के कार्यभार संभालने पर लिए जा सकते हैं.
विशेष मॉडल पर बन सकती है सहमति!
LAB के एक अन्य नेता ने कहा कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा रखे गए प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी और व्यापक सहमति बनाने के लिए संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ चर्चा की जाएगी. उन्होंने कहा, “LAB और KDA को उम्मीद है कि यह प्रक्रिया आगे चलकर उचित संवैधानिक और संसदीय माध्यमों से होकर गुजरेगी, और संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस पर विचार किए जाने की संभावना है.”
9 सितंबर को हुई बातचीत के बाद, लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बताया कि दोनों पक्ष एक ऐसे विशेष मॉडल पर सहमत हुए हैं, जिसे खास तौर पर लद्दाख के लिए तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में एक ऐसी विधायी संस्था होगी, जो न तो कोई राज्य विधानसभा होगी और न ही किसी केंद्र शासित प्रदेश (UT) की पारंपरिक विधानसभा.
LAB और KDA नेताओं की मांगें
LAB और KDA ने मांग की है कि इस प्रस्तावित निर्वाचित संस्था का कराधान (taxation), बजट, खर्च, कर्ज और सार्वजनिक निधियों (जिसमें ‘कंसोलिडेटेड फंड’ और ‘कंटिंजेंसी फंड’ शामिल हैं) पर नियंत्रण होना चाहिए. उन्होंने एक निर्वाचित सरकार और प्रस्तावित लद्दाख विधानसभा के माध्यम से गृह मामलों पर भी नियंत्रण की मांग की है.
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लद्दाख में लगभग 3,350 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच बड़ी विकास परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे.
इनमें लेह हवाई अड्डे की 640 करोड़ रुपये की यात्री टर्मिनल इमारत, 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दारचा सड़क, 9 मेगावाट की हानू छोटी जलविद्युत परियोजना, 66 kV डबल-सर्किट दाह-हानू-खालत्सी ट्रांसमिशन लाइन, भारत का पहला पेट्रोग्लिफ (प्राचीन शैलचित्र) संरक्षण पार्क, और ‘प्रोजेक्ट हिम सरोवर’ के तहत 40 गांवों में विकसित किए गए 40 जल स्रोत शामिल हैं. ये परियोजनाएं कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा, विरासत संरक्षण और जल उपलब्धता को बढ़ावा देंगी.