• January 2, 2026

कंगाल पाकिस्तान के हाथ लगा तेल और गैस का बड़ा खजाना! खुशी से फूले नहीं समा रहे शहबाज शरीफ, क्या

कंगाल पाकिस्तान के हाथ लगा तेल और गैस का बड़ा खजाना! खुशी से फूले नहीं समा रहे शहबाज शरीफ, क्या
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पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडार मिलने का दावा किया है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस खोज को देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और तेल-गैस आयात पर होने वाला खर्च घटेगा.

कोहट जिले के नश्पा ब्लॉक में मिली खोज
पाकिस्तानी एजेंसियों के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के कोहट जिले के नश्पा ब्लॉक में तेल और गैस का भंडार खोजा गया है. यहां से रोजाना करीब 4,100 बैरल कच्चा तेल और 10.5 मिलियन क्यूबिक फीट गैस निकाले जाने की संभावना जताई गई है.

आयात पर निर्भरता घटाने की उम्मीद
पाक सरकार का कहना है कि इस खोज से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेट्रोलियम और गैस सेक्टर की एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि स्थानीय स्तर पर तेल-गैस की खोज से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी और खरीद पर खर्च घटेगा.

OGDCL ने की पुष्टि
पाकिस्तान की ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (OGDCL) ने नश्पा ब्लॉक में तेल और गैस मिलने की पुष्टि की है. कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस खोज के लिए OGDCL और अन्य संबंधित एजेंसियों को बधाई दी है.

2026 तक नए गैस कनेक्शन का लक्ष्य
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस साल ग्राहकों को पर्याप्त गैस की आपूर्ति की गई है. अब सरकार का लक्ष्य जून 2026 तक 3.5 लाख नए गैस कनेक्शन देने का है. पाकिस्तान इस खोज को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रहा है.

संसाधन हैं, लेकिन विकास पर सवाल
हालांकि, इससे पहले भी पाकिस्तान बलूचिस्तान में तेल और गैस के भंडार खोजने का दावा करता रहा है. खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के लोगों का कहना है कि उनके इलाकों के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन उससे मिलने वाली आमदनी स्थानीय विकास पर खर्च नहीं होती.

क्यों पिछड़े हैं खैबर और बलूचिस्तान?
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान, पंजाब के मुकाबले अब भी काफी पिछड़े माने जाते हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सेना, राजनीति और प्रशासन में पाकिस्तानी पंजाबियों का दबदबा है, जबकि उनके इलाकों के संसाधनों का लाभ उन्हें नहीं मिल पाता. यही वजह है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से असंतोष और विरोध देखने को मिलता रहा है.



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