• April 28, 2026

Spice Prices: जंग ने बिगाड़ा मसालों का स्वाद! निर्यात ठप होने से जीरा, धनिया-हल्दी के दाम गिरे

Spice Prices: जंग ने बिगाड़ा मसालों का स्वाद! निर्यात ठप होने से जीरा, धनिया-हल्दी के दाम गिरे
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Spice Prices in India: मिडिल ईस्ट में करीब 40 दिनों तक चले युद्ध और उसके बाद बने तनावपूर्ण हालात का असर अब राजस्थान के मसाला बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिपिंग चार्ज बढ़ने और निर्यात में आई रुकावट के कारण राज्य में तैयार और कच्चे मसालों की मांग तेजी से घट गई है. इसका सीधा असर किसानों और व्यापारियों पर पड़ रहा है.

हालांकि युद्ध और उसके बाद जारी तनाव के हालात के चलते ज्यादातर दूसरे सामानों के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन राजस्थान में पैदा होने वाले मसालों की कीमत कम हो गई है. मसालों के दाम घटने से जहां एक तरफ आम उपभोक्ता खुश हैं और उन्हें थोड़ी राहत मिल गई है, वहीं दूसरी तरफ किसान और व्यापारी परेशान हैं. 

जमा हो गया मसालों का भारी स्टॉक 

राजस्थान की प्रमुख मंडियों में इन दिनों मसालों का भारी स्टॉक जमा हो गया है. व्यापारियों के अनुसार विदेशों से ऑर्डर कम हो गए हैं, जिसके चलते माल बाहर नहीं जा पा रहा. खासतौर पर हल्दी, धनिया, जीरा और अन्य मसालों के दाम में गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि मिर्च के दाम अभी स्थिर बने हुए हैं या कुछ जगहों पर बढ़े भी हैं, क्योंकि मिर्च की पैदावार इस बार कम हुई थी.

जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट के कई देश भारतीय मसालों के बड़े खरीदार हैं. युद्ध और तनाव के कारण वहां की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे आयात कम हो गया है. इसके अलावा समुद्री रास्तों पर जोखिम बढ़ने से शिपिंग कंपनियों ने किराया बढ़ा दिया है, जिससे निर्यात और महंगा हो गया है.

बाजार में नकदी का प्रवाह भी हुआ कम

मंडी व्यापारियों का कहना है कि पहले जहां नियमित रूप से माल की सप्लाई होती थी, अब वहां अनिश्चितता का माहौल है. इससे बाजार में नकदी का प्रवाह भी कम हुआ है. किसान भी अपनी फसल का सही दाम नहीं मिलने से परेशान हैं. कई जगहों पर किसानों को लागत से कम कीमत पर मसाले बेचने पड़ रहे हैं.

हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति थोड़ी राहत लेकर आई है. मसालों की कीमतों में गिरावट से रसोई का बजट कुछ हद तक कम हुआ है. लेकिन व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है.

सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग

व्यापारियों और किसानों की मांग है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाए. साथ ही शिपिंग लागत को कम करने और नए बाजार तलाशने की दिशा में प्रयास किए जाएं, ताकि मसाला उद्योग को इस संकट से बाहर निकाला जा सके.

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