• June 9, 2026

विरोध प्रदर्शन, सत्ता की हनक और गुरबत से जूझता PoK, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की कहानी

विरोध प्रदर्शन, सत्ता की हनक और गुरबत से जूझता PoK, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की कहानी
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Know More About POK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में अबतक इस इलाके में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 30 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. वहीं, करीबन 200 लोग घायल हुए हैं. इस इलाके में लगातार प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. इसकी वजह है, यहां होने वाली 45 विधानसभा सीटों में से 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने का फैसला किया था. 

यहां एक ग्रुप ज्वाइंट अवामी एक्शन कमिटी ने इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया है. उनका तर्क था कि यह राजनीतिक हेरफेर और स्थानीय आवाजें दबाने की कोशिश है. ऐसे में यहां सभा से एक दिन पहले ही झड़पें शुरू हो गई हैं. 

आइए पहले पीओके को समझते हैं, 1947 की आजादी से जुड़ा है मामला

वहीं, अगर पीओके की बात करें, तो यह वो इलाका जब 1947 मं ब्रिटिश भारत में बंटवारा हुआ. यहां भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ने रियासतों को तीन ऑप्शन दिए. इनमें भारत में शामिल होना, पाकिस्तान में शामिल होना और स्वतंत्र रहना. तब के जम्मू कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत में विलय के डॉक्यूमेंट पर साइन कर दिए. यह डॉक्यूमेंट भारत सरकार अधिनियम 1935, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और इंटरनेशनल कानून के तहत कानूनी रूप से मान्य था. ऐसे में करीबन 560 रियासतों ने बिना किसी घटना के ऐसे ही डॉक्यूमेंट पर साइन किए थे. 

मामला तब बिगड़ा जब पाकिस्तान ने अक्टूबर 1947 को इस इलाके में कबायली लड़ाकों को भेजा और मई 1948 में अपनी नियमित सेना को भी वहां भेजा. ऐसे में 1949 को यूएन की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ. सीजफायर लाइन ने इलाके को बांट दिया. इसके बाद 1994 में भारतीय संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित हुआ, इसमें साफ कहा गया कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. मांग की गई कि पाकिस्तान अवैध कब्जे वाले इलाकों को खाली करे.

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दो हिस्सों में बंटा हुआ है पीओके

पीओके दो हिस्सों में बंटा हुआ है. इनमें एक आजाद कश्मीर, कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान शामिल है. इसे 2009 तक नॉर्दन एरियाज कहा जाता रहा था. मुजफ्फराबाद  एजेके की राजधानी है. इसमें तीन डिवीजन हैं. इनमें मीरपुर, मुजफ्फराबाद और पुंछ के तहत दस जिले आते हैं. कागजोंपर पीओके का अपना संविधान, एक सदनीय विधानसभा, पीएम और सुप्रीम कोर्ट है. विधानसभा पीएम और राष्ट्रपति को चुनती है. राष्ट्रपति इस इलाके के संविधान प्रमुख है. 

खेती और पशुपालन पर निर्भर है दो तिहाई आबादी

यहां के लोगों की स्थिति की बात करें, तो नेचर जर्नल में प्रकाशित 2025 की एक स्टडी में जानकारी मिली है कि वहां की लगभग दो तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती और पशुपालन पर निर्भर है. लगभग 29 प्रतिशत लोग कुपोषण से पीड़ित हैं. यह पाकिस्तान के नेशनल एवरेज से 19.9 प्रतिशत से काफी ज्यादा है. यहां के 57.1 प्रतिशत किसी न किसी स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. यह पाकिस्तान के नेशनल एवरेज से 58 प्रतिशत के बराबर है. पहाड़ी इलाकों में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत परिवारों तक पहुंच जाता है. 

इधर वॉलंटरी नेशनल रिव्यू रिपोर्ट की मानें तो एजेके में पांच साल से कम उम्र के लगभग 39 प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं. 14 प्रतिशत का वजन कम है. 4 प्रतिशत बच्चे वेस्टेड हैं. शिशु मृत्युदर प्रति 1 हजार जन्मों पर 47 है. यहां मृत्यु दर करीबन 1 लाख पर 104 है. 

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