• June 4, 2026

राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी का हंटर, कथित वित्तीय हेरफेर के बाद 5% के लोअर सर्किट पर लगा शेयर

राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी का हंटर, कथित वित्तीय हेरफेर के बाद 5% के लोअर सर्किट पर लगा शेयर
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  • सेबी कार्रवाई: राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 5% गिरे.
  • ₹15.15 लाख करोड़ का राजस्व फर्जी पाया गया.
  • कंपनी ने फर्जी कंपनियां बनाईं, प्रमोटर को पैसे भेजे.
  • निवेशकों की चिंता बढ़ी, कंपनी के शेयर 90% टूटे.

Rajesh Export Shares: सोने और ज्वेलरी के कारोबार से जुड़ी कंपनी रोजश एक्सपोर्ट और उसके प्रोमोटर राजेश मेहता पर मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने तगड़ा एक्शन लिया है. इसके चलते कंपनी के शेयर गुरुवार, 4 जून को 5% के लोअर सर्किट पर पहुंच गए.

बीएसई और एनएसई पर यह शेयर गिरकर 103.92 रुपये से 104.65 रुपये के स्तर पर आ गया. कंपनी के शेयरों में यीह गिरावट उस समय आई, जब सेबी ने कंपनी के प्रोमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया और शेयर बाजार में उनके कारोबार पर रोक लगा दी. 

क्या है आरोप?

सेबी के अंतरिम आदेश के मुताबिक, कंपनी ने कारोबारी साल 2021 से 2025 के बीच अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू को करीब 15.35 लाख करोड़ रुपये तक का बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया. इसमें से 15.15 लाख करोड़ यानी कि लगभग 98.7% का रेवेन्यू पूरी तरह से फर्जी पाया गया. असल रेवेन्यू 20111 करोड़ रुपये का था.  सेबी की जांच में और भी कई गंभीर बातें सामने आई हैं.

कंपनी के कागजों पर फर्जी कंपनियां बनाई. राजेश एक्सपोर्ट्स खुद ही माल खरीदकर खुल को ही सामान बेचा. इससे घूम-फिरकर अपनी ही कंपनियों को सामान बेचकर रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया. कंपनी ने अपने स्टैंडअलोन बुक्स में FY22 से FY24 के बीच ‘एफलुएंस’ नाम की एक यूनिट के साथ करीब 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और लगभग 11,488 करोड़ रुपये की खरीद दर्ज की. यह कंपनी के कुल कारोबार का एक बहुत हिस्सा था.

जब सेबी ने जांच की, तो ‘एफलुएंस’ ने साफ कह दिया कि राजेश एक्सपोर्ट्स उसका ग्राहक कभी था ही नहीं और उनके साथ कॉर्पोरेट स्तर पर कोई लेनदेन भी नहीं हुआ. ‘एफलुएंस’ ने खुलासा किया कि उनकी डिलिंग व्यक्तिगत स्तर पर सिर्फ राजेश मेहता के साथ हुई थी. जांच में पाया गया कि कंपनी का पैसा बिना बोर्ड याद ऑडिट कमेटी की मंजूरी के बिना प्रोमोटर के पर्सनल बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किए गए और नियमों का उल्लंघन किया गया. 

शेयर बाजार के नियमों के मुताबिक, पब्लिक लिस्टेड कंपनी का पैसा शेयरधारकों का होता है. प्रमोटर बिना उचित खुलासे या मंजूरी के कंपनी के कैश को शॉर्ट या लॉन्ग टर्म लोन की तरह अपने प्राइवेट अकाउंट्स में रूट नहीं कर सकते. इस तरह के ‘आने-जाने वाले ट्रांजैक्शन’ अकसर वित्तीय धोखाधड़ी छिपाने के लिए किए जाते हैं. 

कैसे हुआ खुलासा?

मार्च 2024 में एक शेयरहोल्डर से मिली शिकायत के आधार पर सेबी ने कंपनी के खिलाफ अपनी जांच शुरू की थी. शेयरधारक ने शिकायत में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया था कि राजेश एक्सपोर्ट्स की बुक्स में बहुत बड़ी रकम ‘Trade Receivables’ के रूप में सालों से अटकी दिख रही है.

सेबी ने जब इस शिकायत के आधार पर कंपनी के शुरुआती डेटा को खंगाला, तो उसे कुछ गड़बड़ी दिखी. कंपनी लगातार अपना टर्नओवर बड़ा बता रही थी, लेकिन उसका कैश फ्लो और बैंक बैलेंस उससे मेल नहीं खा रहे थे. जांच के लिए सेबी ने एक जांच टीम का गठन किया. फिर मामले की फॉरेन्सिक ऑडिट के लिए एक ऑडिटर भी नियुक्त किया गया.

शेयर बाजार और निवेशकों पर असर

सेबी के लगाए गए इन आरोपों के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के भविष्य को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं. इसमें देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का भी इस पर दांव लगा हुआ है. मार्च 2026 तक एलआईसी की कंपनी में 10.8% तक की हिस्सेदारी है. इससे संस्थागत निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है. यह शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 90% तक टूट चुका है. 



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