• September 8, 2026

संजय दत्त ने जेल में कैसे गुजारे दिन? जेलर बोली- ‘मराठी नहीं सीख पाए, लेकिन…’

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महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोलने को लेकर अक्सर विवाद रहता है. महाराष्ट्र में टैक्सी, कैब चालको और ऑटो चालकों को अपना काम चलाने के लिए मराठी सीखना जरुरी है. ऐसे में बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त के एक बयान ने सभी को चौंका दिया है. मुंबई में एक दही हांडी कार्यक्रम में संजय दत्त राज्य परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के साथ पहुंचे थे. इस दौरान संजय दत्त हिंदी में बोलने लगे जिस पर मंत्री ने उन्हें मराठी में बात करने के लिए टोका तो उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि मैं 5 साल तक जेल में रहा और मराठी नहीं सीख पाया. अब उनके जेल विभाग के पूर्व प्रमुख ने उनके जेल के दिनों को याद किया है.

6 साल की हुई थी सजा
संजय दत्त को मुंबई की स्पेशल टाडा कोर्ट ने गैर-कानूनी तरीके से AK-47 राइफल रखने के लिए छह साल की सजा सुनाई थी. यह राइफल दाऊद इब्राहिम के गैंग की ओर से मुंबई भेजी गई खेप का हिस्सा थी. उन्हें सिर्फ आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था. संजय दत्त ने जेल में छह साल नहीं बिताए, जैसा कि वे दावा करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा घटाकर पांच साल कर दी थी और पैरोल, फर्लो और कानूनी रियायतों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने जेल में चार साल से कुछ ज़्यादा समय ही बिताया. हालांकि जेल में मराठी बोलने वाले कई कैदी थे और जेल का स्टाफ भी मराठी था, फिर भी वे उनसे हिंदी में बात करते थे.

जेल में नहीं सीख सके मराठी
महाराष्ट्र जेल विभाग की पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) स्वाति साठे ने याद किया कि जेल में दत्त मराठी तो नहीं सीख पाए, लेकिन उन्होंने एक और भाषा जरूर सीख ली – डराने-धमकाने की भाषा. साठे ने बताया कि आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद दत्त सदमे में थे और जेल की जिंदगी को अपना नहीं पा रहे थे. कोर्ट के आदेश के बाद जब उन्हें पहली बार जेल लाया गया, तो उन्होंने जेल की यूनिफॉर्म पहनने से इनकार कर दिया. जेल वॉर्डन ने उनसे कैदियों के लिए बनी सफेद शर्ट पहनने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने नखरे दिखाए और उनके साथ बदतमीजी से पेश आए.

जेल स्टाफ ने उनके व्यवहार के बारे में जेल सुपरिटेंडेंट स्वाति साठे को बताया. वह सख्त अनुशासन लागू करने और बिना किसी बकवास के काम करने के लिए जानी जाती थीं. जेल के नियमों का उल्लंघन करने पर खतरनाक गैंगस्टरों की बुरी तरह पिटाई करने के लिए उनकी ख्याति थी. उनकी छवि से हिरासत में मौजूद पक्के अपराधी भी डरते थे. दत्त के बुरे व्यवहार के बारे में सुनकर गुस्से में आईं साठे उनकी बैरक में पहुंचीं. अपनी लाठी उनकी ओर करते हुए उन्होंने चेतावनी दी, “संजू, तू बातों की जबान समझेगा या लातों की?”

चेंज कर ली यूनिफॉर्म
साठे के आक्रामक रवैये से दत्त डर गए और उनके आदेश का पालन करना ही बेहतर समझा. वह तुरंत चेंजिंग रूम में गए और जेल की यूनिफॉर्म पहन ली. डराने-धमकाने की भाषा काम कर गई और उस दिन के बाद दत्त ने जेल में कभी नखरे नहीं दिखाए. असल में, कुछ दिनों बाद दत्त के साठे और जेल के अन्य अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध बन गए. उन्होंने जेल अधिकारियों को कई कार्यक्रम आयोजित करने में मदद की और अपनी फ़िल्म “लगे रहो मुन्ना भाई” से प्रेरित होकर जेल रेडियो भी चलाया.

15 अगस्त तक मराठी सीखने की डेडलाइन दी
संजय दत्त का ये बयान उस समय में आया है जब मंत्री प्रताप सरनाइक ने टैक्सी ड्राइवर्स को 15 अगस्त तक मराठी सीखने की डेडलाइन दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके परमिट सस्पेंड कर दिए जाएंगे.

महाराष्ट्र में हिंदी बोलने वाले लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आदेश को एक साल के लिए टाल दिया. इससे सरनाइक और उनके नेता एकनाथ शिंदे – जो डिप्टी सीएम भी हैं को शर्मिंदगी उठानी पड़ी.

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