• April 11, 2026

पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता फेल हुई तो क्या होगा? डोनाल्ड ट्रंप ने बताया बैकअप

पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता फेल हुई तो क्या होगा? डोनाल्ड ट्रंप ने बताया बैकअप
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता विफल होने की स्थिति में अमेरिका के पास कोई वैकल्पिक योजना नहीं है. ये चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दोनों पक्षों के हाई लेवल डेलिगेशन आज इस्लामाबाद में बैठक कर रहे हैं. 

अमेरिका-ईरान वार्ता विफल हुई तो क्या होगा?

जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर अमेरिका-ईरान वार्ता विफल हो जाती है और तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने से इनकार कर देता है तो क्या वॉशिंगटन के पास कोई वैकल्पिक योजना तैयार है, इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि बैकअप प्लान की जरूरत नहीं है. उनकी सेना पराजित हो चुकी है. उनके पास बहुत कम मिसाइलें हैं और उनकी उत्पादन क्षमता भी बहुत कम है. हमने उन्हें करारा झटका दिया है. हमारी सेना अद्भुत है और उन्होंने जो काम किया है वह सराहनीय है. 

खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और अधिक सेना की तैनाती कर दी है, जबकि 2 सप्ताह का युद्धविराम कई हफ्तों तक चली जंग के बाद खाड़ी क्षेत्र में शांति का एक दुर्लभ क्षण लेकर आया है. 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के नेतृत्व में और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची सहित ईरानी प्रतिनिधिमंडल आज सुबह इस्लामाबाद पहुंचा. पाकिस्तान के मंत्री इशाक डार और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने उनका स्वागत किया.

जेडी वेंस भी पहुंचे पाकिस्तान

वार्ता में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व करने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं. पेरिस से रवाना होने से पहले उन्होंने तेहरान को चेतावनी दी कि वे वॉशिंगटन के साथ खिलवाड़ न करें. उन्होंने कहा, “अगर वे हमारे साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता चलेगा कि वार्ताकार दल इतना सहयोग नहीं करेगा.”

पहले वार्ता की शर्तों पर क्या मतभेद थे

अमेरिका और ईरान के बीच पहले वार्ता की शर्तों पर मतभेद थे. ट्रंप प्रशासन ने 15 सूत्री रूपरेखा तैयार की थी, जिसमें कथित तौर पर ईरान से अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम छोड़ने और अपनी सैन्य शक्ति पर सीमाएं स्वीकार करने की मांग की गई थी. वहीं दूसरी ओर ईरान ने अपनी 10 सूत्री योजना भेजी थी, जिसमें हर्जाने की मांग की गई थी और अमेरिका से होर्मुज पर तेहरान की संप्रभुता को मान्यता देने की अपील की थी. 

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