• May 7, 2026

ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: ड्रोन, साइबर और एयर पावर पर बड़ा अलर्ट, एक्सपर्ट बोले- अगली लड़ाई और ख

ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: ड्रोन, साइबर और एयर पावर पर बड़ा अलर्ट, एक्सपर्ट बोले- अगली लड़ाई और ख
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पिछले साल 6-7 मई की रात शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर अब भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब सीमा पर ड्रोनों की बौछार हो रही थी, भारतीय मिसाइल सीमा पार पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर रहे थीं. करीब 88 घंटे तक चले इस सैन्य टकराव ने न सिर्फ भारत की जवाबी कार्रवाई की ‘रेड लाइन्स’ बदल दीं, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि आने वाली जंगें पहले जैसी नहीं होंगी.

एक साल बाद, रक्षा और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ इस ऑपरेशन को भारत की सैन्य सोच में निर्णायक बदलाव के तौर पर देख रहे हैं—जहां अब “स्ट्रैटेजिक रेस्ट्रेंट” की जगह “स्ट्रैटेजिक प्रोएक्टिवनेस” ने ले ली है.

रक्षा और रणनीतिक मामलों के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ जमीन या हवा में नहीं, बल्कि साइबर, सूचना और मनोवैज्ञानिक मोर्चों पर भी लड़ा जाएगा और यही ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी सीख है.

ड्रोन वॉरफेयर: अगली चुनौती और ज्यादा खतरनाक

ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन हमले हुए. लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ शुरुआत थी. रिटायर्ड एयर कमोडोर गौरव एम त्रिपाठी कहते हैं, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने देखा कि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया. ज्यादातर ड्रोन सिर्फ भारतीय हथियारों को व्यस्त रखने के लिए थे ताकि बाद में हमला करने वाले ड्रोन आ सकें. लेकिन दुश्मन स्मार्ट है. अगली बार जो ड्रोन आएंगे, वे ज्यादा मजबूत होंगे, उन्हें जाम करना मुश्किल होगा, उनके पास बेहतर नेविगेशन होगा, शायद GPS की जरूरत भी न पड़े और उनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल होमिंग डिवाइस भी हो सकते हैं. ये ड्रोन स्वार्म के रूप में काम करेंगे.” यानी साफ है—अगली जंग में ड्रोन सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक गेम-चेंजर होंगे.

एयर पावर: तीनों सेनाओं का संयुक्त इस्तेमाल जरूरी

इस ऑपरेशन ने एक और बड़ी बात स्पष्ट कर दी—एयर पावर अब निर्णायक भूमिका में है. लेकिन इसे अलग-अलग नहीं, बल्कि तीनों सेनाओं के संयुक्त रूप में इस्तेमाल करना होगा. एयर कमोडोर त्रिपाठी कहते हैं, “भविष्य में किसी भी युद्ध में तीनों सेनाओं की संयुक्त एयर पावर का इस्तेमाल करना होगा ताकि वह एक सक्षम दुश्मन के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम कर सके.” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एंटी-ड्रोन सिस्टम को अब सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर तैनात करना होगा—हर संवेदनशील जगह पर.

S-400 और ब्रह्मोस: भारत की मजबूत ढाल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने S-400, आकाश मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी प्रणालियों का आक्रामक तरीके से इस्तेमाल किया. इससे न सिर्फ भारतीय एयरस्पेस सुरक्षित रहा, बल्कि दुश्मन को करारा जवाब भी मिला.
एयर कमोडोर त्रिपाठी बताते हैं, “हमने S-400 सिस्टम का बहुत आक्रामक तरीके से इस्तेमाल किया. हमने उन्हें लगातार मूव किया, छिपाया और उनके डिकॉय भी बनाए ताकि दुश्मन को भ्रमित किया जा सके. इस तकनीक को सैन्य भाषा में ‘कैमोफ्लाज, कंसीलमेंट और डिसेप्शन’ कहा जाता है.”

स्ट्रैटेजिक रेस्ट्रेंट से प्रोएक्टिव भारत 

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल दुश्यंत सिंह के मुताबिक, इस ऑपरेशन ने भारत की सैन्य सोच को पूरी तरह बदल दिया. वे कहते हैं, “ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी सीख यह है कि हमने ‘स्ट्रैटेजिक रेस्ट्रेंट’ से ‘स्ट्रैटेजिक प्रोएक्टिवनेस’ की ओर कदम बढ़ाया है. अब हमें बहुत कम समय में जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब प्रतिक्रिया की गति, गहराई और स्तर—तीनों पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुके हैं.

सिर्फ गोलियां नहीं, ‘इन्फॉर्मेशन वॉर’ भी 

इस ऑपरेशन के दौरान भारत को सिर्फ ड्रोन हमलों का ही सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि एक बड़े स्तर पर गलत सूचना अभियान (misinformation campaign) से भी जूझना पड़ा. इससे साफ है कि भविष्य की जंग में “नैरेटिव” भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितना हथियार.

मल्टी-डोमेन वॉर: स्पेस से साइबर तक 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले युद्ध पूरी तरह मल्टी-डोमेन होंगे—जहां स्पेस, समुद्र के नीचे, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सब एक साथ काम करेंगे. लेफ्टिनेंट जनरल सिंह कहते हैं, “भविष्य के ऑपरेशन मल्टी-डोमेन होंगे. इसलिए सैन्य संचार को मजबूत और लचीला बनाना होगा, ताकि वह इलेक्ट्रॉनिक, साइबर और स्पेस से होने वाले हमलों को झेल सके.”

‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ अलग होगा 

कार्नेगी इंडिया के सुरक्षा विशेषज्ञ दिनाकर पेरि मानते हैं कि यह ऑपरेशन भारत के लिए “वाटरशेड मोमेंट” था. वे चेतावनी देते हैं, “पाकिस्तान और चीन अब जानते हैं कि भारतीय सेना क्या कर सकती है और उसकी सीमाएं क्या हैं. अगला संघर्ष या ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ पिछले जैसा नहीं होगा.”

तेजी से हथियार खरीद और आधुनिकीकरण 

ऑपरेशन के बाद रक्षा मंत्रालय ने कई इमरजेंसी खरीद को मंजूरी दी—जिसमें प्रिसिजन हथियार, ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, S-400 स्टॉक और एंटी-टैंक मिसाइल शामिल हैं. इसके अलावा 114 राफेल जैसे बड़े सौदे भी पाइपलाइन में हैं, जो आने वाले वर्षों में भारत की ताकत को और बढ़ाएंगे.

बदल चुकी है जंग की तस्वीर 

ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब सिर्फ जवाब नहीं देगा, बल्कि पहल भी करेगा. लेकिन इसके साथ ही खतरे भी जटिल हो गए हैं—ड्रोन स्वार्म, साइबर हमले और सूचना युद्ध अब नई हकीकत हैं.
एक साल बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भारत अगली, और ज्यादा कठिन जंग के लिए पूरी तरह तैयार है?



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