• July 7, 2026

PoK में इंकलाब, चूर हुआ मुनीर का ख्वाब…, 29 दिनों के आंदोलन के बाद अब आजादी का काउंटडाउन शुरू!

PoK में इंकलाब, चूर हुआ मुनीर का ख्वाब…, 29 दिनों के आंदोलन के बाद अब आजादी का काउंटडाउन शुरू!
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पाकिस्तान की हुकूमत पिछले 79 साल से एक ही सपना देखती रही है, जम्मू-कश्मीर पर कब्जे का सपना. यही ख्वाब आज पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी देख रहे हैं, लेकिन हालात ऐसे बन गए हैं कि अब जम्मू-कश्मीर तो दूर पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भी उसके हाथ से फिसलता नजर आ रहा है. पिछले 29 दिनों से पीओके की सड़कों पर हजारों लोग पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. 

महिलाओं से लेकर बुजुर्गों और बच्चों तक हर कोई पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ खुलकर उतर आया है. आंदोलनकारियों ने पाकिस्तान सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए 8 जुलाई की डेडलाइन दी है. सवाल यह है कि आखिर पीओके में ऐसा क्या हो गया कि लोग पाकिस्तान के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हो गए? ‘ये जो दहशतगर्दी है… इसके पीछे वर्दी है’ जैसे नारों के साथ पीओके में हर दिन पाकिस्तान सेना के खिलाफ आवाज बुलंद हो रही है.

प्रदर्शनकारियों का क्या आरोप?

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सेना दमन, गोलीबारी और गिरफ्तारी के जरिए उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. लेकिन इस बार हालात अलग हैं. रावलकोट से लेकर मुजफ्फराबाद, मीरपुर और ददियाल तक हजारों लोग सड़कों पर डटे हुए हैं. महिलाओं का कहना है कि वे अब पीछे हटने वाली नहीं हैं और चाहे गोली खानी पड़े या जेल जाना पड़े, वे अपने अधिकार लेकर ही रहेंगी.

रावलकोट बस स्टैंड पर 11 जून से दस हजार से ज्यादा महिलाएं धरने पर बैठी हैं. उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी मौजूद हैं. आंदोलनकारियों का आरोप है कि 14 जून से पाकिस्तान सरकार ने खाने-पीने का सामान, दवाइयों और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई रोक दी है. बॉर्डर पर दर्जनों ट्रक खड़े हैं, लेकिन उन्हें पीओके में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि भूखे रह लेंगे, लेकिन पाकिस्तान के आगे झुकेंगे नहीं.

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने आसिम मुनीर की तुलना इस्लामी इतिहास के सबसे विवादित शासक यज़ीद से करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान यज़ीद की तरह जुल्म करेगा, तो वे हुसैन की तरह लड़ेंगे. उनका कहना है कि उन्हें जेल में डाल दिया जाए या गोलियां मार दी जाएं, लेकिन वे अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं छोड़ेंगे. इन नारों और भाषणों ने साफ कर दिया है कि अब आंदोलन केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष में बदल चुका है.

आंदोलन को रोकने पाक आर्मी ने झोंकी ताकत

पाकिस्तानी सेना ने इस आंदोलन को दबाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. घर-घर छापेमारी की गई, सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया, आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत नेताओं पर केस दर्ज किए गए और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं. लेकिन हर कार्रवाई के बाद आंदोलन और ज्यादा मजबूत होता गया. आंदोलन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि 8 जुलाई तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और व्यापक होगा.

आंदोलनकारियों की कुल 38 मांगें हैं. इनमें बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ गिरफ्तार नेताओं की रिहाई और दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग शामिल है. लेकिन सबसे बड़ा विवाद उन 12 विधानसभा सीटों को लेकर है जो जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के नाम पर आरक्षित हैं. आंदोलनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों के जरिए अपने समर्थकों को विधानसभा में भेजती है और पूरे पीओके की राजनीति को नियंत्रित करती है. यही वजह है कि सरकार किसी भी कीमत पर इस व्यवस्था को बदलना नहीं चाहती.

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प्रदर्शनकारियों ने सड़कें की जाम

4 जुलाई को ददियाल में प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं. इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए. मुजफ्फराबाद में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए. प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाकर विरोध जताया, जबकि सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया.

आंदोलन से जुड़े आंकड़े भी पाकिस्तान के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं. अब तक 59 लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है. 576 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. करीब 150 नेताओं के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं. 5 जून से इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और कई इलाकों में खाद्य सामग्री तथा दवाइयों की सप्लाई भी रोक दी गई है. इसके बावजूद प्रदर्शन लगातार जारी है.

आंदोलन के नेता सरदार अमान खान ने खुली सभा में कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तो वे नियंत्रण रेखा (LoC) की ओर मार्च करेंगे. रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोगों की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि अब फैसला जनता करेगी कि आगे का रास्ता क्या होगा. इस बयान ने पाकिस्तान सरकार और सेना की चिंता और बढ़ा दी है.

लंदन में भी पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन

पीओके का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजने लगा है. लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर हजारों लोगों ने मार्च निकालकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया. इसमें कश्मीरी प्रवासियों के साथ-साथ पश्तून और बलोच समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए और पीओके के लोगों के साथ एकजुटता दिखाई.

8 जुलाई की डेडलाइन पर टिकी निगाहें

अब सभी की नजर 8 जुलाई की डेडलाइन पर टिकी है. यदि पाकिस्तान सरकार आंदोलनकारियों की मांगें नहीं मानती, तो पीओके में विरोध और तेज हो सकता है. जिस पाकिस्तान ने दशकों तक कश्मीर के मुद्दे पर दुनिया के सामने भारत पर आरोप लगाए, आज उसी के कब्जे वाले कश्मीर में लोग उसके खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहे हैं. यही वजह है कि पीओके का यह आंदोलन पाकिस्तान सरकार और आसिम मुनीर के लिए अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक और सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है.

 



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