• July 27, 2026

प्रधान… BJP का वो चेहरा, जिन्होंने हारते चुनाव के बीच ऐसे बाजी पलट दी

प्रधान… BJP का वो चेहरा, जिन्होंने हारते चुनाव के बीच ऐसे बाजी पलट दी
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बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण राज्यों में भरोसेमंद चुनाव प्रबंधक बनने और मोदी सरकार के तीन कार्यकाल में अहम मंत्रालय संभालने से लेकर शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने तक धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन को नीट पेपर लीक के होने से देशभर में भड़के विरोध प्रदर्शनों के बाद बड़ा झटका लगा. कई बार उन्होंने बीजेपी के लिए मुश्किल लग रही राह को जिस तरह से जीत में बदला उससे वह पार्टी के भीतर एक बड़े चुनावी रणनीतिकार के रूप में स्थापित हो गए थे.

परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और नीट पेपर लीक को लेकर इस्तीफे की मांग करते हुए सीजेपी के नेतृत्व में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के 35 दिन बाद शनिवार (25 जुलाई 2026) को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनका का इस्तीफा आंदोलन को लेकर सरकार के शुरुआती उपेक्षापूर्ण रुख से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. 

साल 1983 में एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र प्रधान दो दशक बाद तीन बार केंद्रीय मंत्री बने. अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. हाल के सालों में बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी देने के मामले में भी वह बीजेपी की पहली पसंद रहे. उन्हें 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. प्रधान का सबसे महत्वकांक्षी लक्ष्य उनका गृह राज्य ओडिशा रहा, जहां 2024 में बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई. 

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें केवल एक जिम्मेदारी दी गई थी, जो नंदीग्राम सीट की कमान संभालना था. इसी सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव लड़ा था और राज्य में उनकी पार्टी की भारी जीत के बावजूद वह यह सीट हार गई थीं. धर्मेंद्र प्रधान ने साल 2000 में ओडिशा की पल्लाहारा सीट से चुनाव लड़कर अपने चुनावी सफर की शुरुआत की थी. उन्होंने 2004 में देवगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. इस सीट पर पहले उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान का कब्जा था. 

2009 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सीधे चुनावी राजनीति से दूरी बना ली. हालांकि, उनकी संगठनात्मक क्षमता और कामकाज के कौशल के कारण 2010 में उन्हें बीजेपी का महासचिव बनाया गया. इसके बाद 2012 में वह बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए. 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को स्वतंत्र प्रभार के साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री बनाया गया. गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने वाली उज्ज्वला योजना के कारण धर्मेंद्र प्रधान को लोकप्रिय रूप से ‘उज्ज्वला मैन’ कहा जाने लगा. उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले केंद्रीय मंत्री का श्रेय भी दिया जाता है. 

साल 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा मंत्रालय अपने पास बरकरार रखा. हालांकि, उनका यह कार्यकाल कथित प्रश्नपत्र लीक विवाद के बीच कठिन शुरुआत के साथ शुरू हुआ. ओडिशा में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल धर्मेंद्र प्रधान को विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल (BJD) को हराकर 78 सीट पर जीत हासिल करने के बाद राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री की दौड़ में भी माना जा रहा था.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ शानदार ट्यूनिंग के चलते पिछले साल हुए बिहार चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी को फी सहायता पहुंचायी है. बिहार की राजनीति में जब भी नीतीश कुमार के एनडीए से होने पर या उनकी वापसी पर धर्मेंद्र प्रधान को ही बीजेपी ने एक्टिव किया था. साल 2013 में जब नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो रहे थे तब धर्मेंद्र प्रधान ने उन्हें खूब समझाने की कीशिश की थी. ठीक वैसे ही साल 2022 में भी जब नीतीश खेमे में ऐसी सुगबुगाहट शुरू हुई तो प्रधान को ही पार्टी ने बात करने भेजा.



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