• May 11, 2026

PM मोदी की अपील के बाद IT यूनियन ने कहा- फ्लेक्सिबल वर्किंग को दें कानूनी मान्यता

PM मोदी की अपील के बाद IT यूनियन ने कहा- फ्लेक्सिबल वर्किंग को दें कानूनी मान्यता
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Work From Home: पीएम मोदी ने अपने हालिया किए गए हैदराबाद संबोधन में वर्क फ्रॉम होम को प्रिफरेंस देने के लिए कहा है. जिसके बाद से तमाम कर्मचारियों के बीच खुशी का माहौल है. हालांकि पीएम ने अभी केवल कंपनियों से अपील की है, इसे लागू नहीं किया है. लेकिन फिर भी अब आई सेक्टर के कर्मचारी वर्कफ्रॉम होम को दोबारा से लागू करने की मांग कर रहे हैं.

वर्क फ्रॉम होम की मांग
दरअसल इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार भारत के आईटी कर्मचारियों के संगठन नासेंट इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉई सीनेट (NITES) ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडवीय को एक पत्र लिखकर मांग की है कि जहां संभव हो, वहां आईटी और आईटीईएस सेक्टर में वर्क फ्रॉम होम (WFH) को लागू कर दिया जाए.

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पत्र में लिखा है…
NITES ने 11 मई 2026 को ये पत्र लिखा है जिसमें केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से देशहित में ये मांग की है. उन्होंने इसमें लिखा है कि आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े सेक्टर में जहां संभव हो, वहां कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू किया जाए. इस पत्र में ये भी लिखा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के आईटी और आईटीईएस सेक्टर ने साबित कर दिया था कि बड़े स्तर पर घर से काम करना संभव है और इससे कामकाज या उत्पादकता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता.

इतना ही नहीं संगठन के मुताबिक, महामारी के समय ज्यादातर आईटी कंपनियों ने कर्मचारियों को सफलतापूर्वक घर से काम करने की सुविधा दी थी. क्लाउड सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी टूल्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वर्चुअल मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से कंपनियों का काम सामान्य रूप से चलता रहा. इससे साबित होता है कि टेक्नोलॉजी से जुड़े कई पदों पर वर्क फ्रॉम होम पूरी तरह व्यावहारिक, तकनीकी रूप से संभव और लंबे समय तक चलने वाला विकल्प है.

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संगठन ने बताई कर्मचारियों की परेशानियां
इस पत्र में संगठन ने अपनी परेशानियां बताते हुए ये भी लिखा है कि कर्मचारियों का रोजाना ऑफिस आना-जाना भी चिंता का विषय है. लाखों कर्मचारी रोज कई घंटे सफर में ही बिता देते हैं, जबकि उनका काम घर से भी किया जा सकता है. गैर-जरूरी ऑफिस यात्रा से ईंधन की खपत बढ़ती है, ट्रैफिक जाम बढ़ता है, पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर दबाव पड़ता है और पर्यावरण को भी नुकसान होता है. साथ ही इसका असर कर्मचारियों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी पड़ता है. संगठन ने ये कहा कि जहां संभव हो, वहां रिमोट वर्क अपनाने से देश में ईंधन बचाने की कोशिशों को मदद मिल सकती है और कामकाज पर भी असर नहीं पड़ेगा.



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