• August 26, 2026

बाढ़ के कहर से भारत-चीन तक अलर्ट, मदद के लिए पहुंची IAF, नेपाल बोला- थैंक्यू

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<p style="text-align: justify;">नेपाल में सुबह-सुबह ऐसे काल ने दस्तक दी है जिसकी तस्वीरें देखकर पूरी दुनिया कांप उठी. नेपाल-चीन बॉर्डर से आई तस्वीर में सैलाब तिनके की तरह विशाल इमारत और जमीन पर जान बचाने के लिए भागते इंसान को अपने साथ बहा ले गया. ऐसी एक नहीं कई तस्वीरें हैं जब तबाही ने आने से पहले किसी तरह की कोई चेतावनी तक नहीं दी थी. राजधानी काठमांडू से 125 किलोमीटर दूर रसुवा जिले में बुधवार (26 अगस्त 2026) को भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ अपने साथ बाजार के बाजार बहा ले गई. राहत और बचाव का काम युद्ध स्तर पर शुरू हुआ है, लेकिन जितना दिख रहा है तबाही उससे कहीं ज्यादा बड़ी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत ने नेपाल को भेजी मदद</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नेपाल पर्यटन से मिली जानकारी के मुताबिक इस तबाही में 133 भारतीय समेत 291 विदेशी पर्यटक लापता हैं. वहीं कुल 400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिसमें अमेरिका के 47, ब्रिटेन के 33 और नेपाल के 62 नागरिक भी शामिल हैं. नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए चीन और भारत से मदद मांगी. भारत ने नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) और जरूरी दवाइयां भेजी है. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस मदद के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारत सरकार का धन्यवाद किया.</p>
<p style="text-align: justify;">इस त्रासदी के बाद बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है. बिहार के मुख्य सचिव ने हाई लेवल बैठक की और NDRF और SDRF को तैयारियों के निर्देश जारी किए गए. गंडक नदी के किनारे वाले जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया केंद्रीय गृह मंत्री <a title="अमित शाह" href="https://www.abplive.com/topic/amit-shah" data-type="interlinkingkeywords">अमित शाह</a> ने बिहार के सीएम <a title="सम्राट चौधरी" href="https://www.abplive.com/topic/samrat-chaudhary" data-type="interlinkingkeywords">सम्राट चौधरी</a> से बात की और संभावित संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">नेपाल के इस इलाके में पहाड़ शांत था… नदी अपने रास्ते बह रही थी और फिर अचानक जैसे आसमान फट पड़ा था. शांत नदी में मौत का सैलाब दौडऩे लगा था. जान बचाने के लिए एक ट्रक दौड़ता दिखा और ट्रक के ठीक पीछे लोग भी मौजूद थे, लेकिन सैलाब सबकुछ लील जाने वाली रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा था. किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला. बड़े-बड़े पुल धराशायी हो गए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पलभर में सबकुछ बहा ले गया सैलाब</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सबसे खतरनाक तस्वीर चीन नेपाल बॉर्डर से आई. यहां जमीन पर गाड़ियां और कुछ लोग मौजूद हैं. इमारत की तरफ बढ़ते सैलाब की दस्तक होती है तो हर कोई जान बचाने के लिए भागता हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन एक मिनट 14 सेकंड के इस वीडियो में 33वें सेकंड बाद सुनामी आती है और पल भर में सब कुछ तबाह कर देती है. इमारत, इंसान, कार सब कुछ मौत के सैलाब में बह चुका था और कयामत अब आगे की तरफ जा रही थी. लोग पूरी ताकत के साथ भाग रहे थे ताकि सैलाब को हरा सकें, लेकिन विनाश बनकर आए सैलाब ने कोई रहम नहीं किया. 10 सेकंड के भीतर यहां जिंदगी का नामोनिशान तक मिट गया.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद सैलाब आगे बढ़ा तो नेपाल के लिए काल बन गया. नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी सैलाब आ चुका था, लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि ना बादल फटा, ना मूसलाधार बारिश हुई और यहां तक कि <a title="मौसम" href="https://www.abplive.com/weather" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a> विभाग तक को कोई आहट नहीं मिली. पलक झपकते ही नदी का पानी बस्तियों को निगलते हुए चला गया. प्रधानमंत्री <a title="नरेंद्र मोदी" href="https://www.abplive.com/topic/narendra-modi" data-type="interlinkingkeywords">नरेंद्र मोदी</a> ने नेपाल के पीएम बालेन शाह से बात की और नेपाल में हुई भीषण तबाही पर दुख जताया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत ने दिया मदद का भरोसा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पीएम मोदी ने नेपाल को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है. दूसरी तरफ नेपाल में आई बाढ़ के बाद सशस्त्र सीमा बल ने भारत नेपाल सीमा पर तैनात अपनी 11 यूनिट्स को अलर्ट किया है. लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर इतनी बड़ी तबाही कैसे आई? क्या हिमालय की बर्फीली छाती में कोई बांध टूटा? क्या कोई ग्लेशियर झील अचानक फट पड़ी? आखिर नेपाल से तिब्बत तक…हिमालय के इस हिस्से में प्रकृति ने ऐसा विकराल रूप क्यों दिखाया?</p>
<p style="text-align: justify;">तबाही का सैलाब गुजरने के बाद हर तरफ कई फीट मलबे की चादर बिछी है. जहां बाजार गुलजार हुआ करता था, वहां मौत ने सबकुछ उजाड़कर चली गई. हालत ये है कि सीटी बजाकर लोगों को आगाह किया जा रहा था, लेकिन किसी को संभलने का मौका नहीं मिला. जो नदी कल तक जीवन थी, वो बुधवार सुबह 9 बजे काल की तरह दिखने लगी. पानी के प्रचंड वेग के साथ आया मलबा, पत्थर, पेड़ और चट्टानों के सामने सब कुछ बौना पड़ गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अचानक कैसे आ गई बाढ़?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस सबके बीच सवाल ये है कि आखिर ये भीषण तबाही हुई क्यों? शुरुआती वैज्ञानिक आकलन यही इशारा कर रहे हैं कि नेपाल की तरफ से एक विशालकाय बर्फ का टीला खिसक कर सीधे नदी में जा गिरा और इस भारी-भरकम बर्फीले मलबे ने एक प्राकृतिक बांध की तरह काम किया और नदी के पानी को एक जगह रोक दिया था. पानी रुकने से पीछे की तरफ एक बहुत बड़ा दबाव बनता चला गया. जब पानी का दबाव सीमा से बहुत ज्यादा हो गया तो बर्फीला बांध अचानक धमाके के साथ टूट गया. इसके बाद निचले इलाकों की तरफ पानी इतनी तेज रफ्तार और रौद्र रूप के साथ आया कि भोटेकोशी नदी में भयानक उफान आ गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नेपाल जलप्रलय के बाद बिहार में अलर्ट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नेपाल की भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों से पानी गुजर गया है और अब हर तरफ कई फीट मलबा और उसमें धंसी हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं. कुछ मकान दिख रहे हैं, लेकिन वो भी तबाही के मलबे में सने हुए हैं. नेपाल में आई जलप्रलय के बाद बिहार पर बाढ़ का खतरा है वहां भी नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. राज्य सरकार ने कई जिलों को अलर्ट मो़ड पर रहने का निर्देश दिया है. 81 किलोमीटर लंबी भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल की त्रिशूली नदी में मिल जाती है. जो बाद में भारत में गंडक नदी के रूप में बहती है. गंडक नेपाल के त्रिवेणी शहर के पास भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है. इसके बाद गंडकनदी दक्षिण दिशा में बहती है और उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सीमा बनाती है.</p>
<p style="text-align: justify;">ये बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सीवान, सारण और वैशाली जिलों और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और देवरिया जिलों से होकर बहती है और हाजीपुर में गंगा नदी से मिल जाती है. नेपाल से नीचे की तरफ बहने वाला अतिरिक्त पानी दो से तीन घंटे के भीतर गंडक नदी तक पहुंच सकता है. यही वजह है भारत नेपाल सीमा पर 10 एनडीआरएफ टीमों को जबकि 10 टीमों को यूपी में भारत-नेपाल सीमा पर तैनात किया गया है. दूसरी तरफ भारत पड़ोसी देश नेपाल को वायु सेना के विमानों के जरिए राहत सामग्री भेज रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;">कई इलाकों में ऐसा मंजर है कि हैलिपैड तक बह गया और रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को बिना उतरे लौटना पड़ा. नेपाल में बाढ़ से करीब 13 पावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं, जो रसुवा और नुवाकोट जिले में नदी पर बने हुए थे. लांगटांग हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे करीब 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं.</p>


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