• January 16, 2026

तेल के भूखे ट्रंप! वेनेजुएला के बाद अब इस देश को कंट्रोल करने का बनाया खतरनाक गेम प्लान

तेल के भूखे ट्रंप! वेनेजुएला के बाद अब इस देश को कंट्रोल करने का बनाया खतरनाक गेम प्लान
Share

दुनिया भर में टैरिफ लगाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचाने के बाद अब वैश्विक शक्ति अमेरिका एक नए और ज्यादा संवेदनशील खेल में उतरता दिख रहा है. साल 2026 की शुरुआत में ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को झकझोर दिया है. आधिकारिक तौर पर इस कार्रवाई की वजह ड्रग ट्रैफिकिंग और भ्रष्टाचार बताई गई, लेकिन वैश्विक मामलों के जानकार इसके पीछे तेल की बड़ी भू-राजनीति देख रहे हैं.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिकी दखल के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिला है.

वेनेजुएला के तेल की पहली खेप बिक चुकी?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने वेनेजुएला के कच्चे तेल की बिक्री का पहला चरण पूरा कर लिया है, जिसमें करीब 500 मिलियन डॉलर मूल्य का तेल बेचा गया है. अमेरिकी अधिकारियों ने भी इस रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में ऐसे और सौदे हो सकते हैं.

इसी बीच, अमेरिका की नजर अब ईरान के तेल भंडार पर टिक गई है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुलकर संकेत दे चुके हैं कि ईरान उनका अगला निशाना हो सकता है. इसका मतलब साफ है कि मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़ी भू-राजनीतिक उथल-पुथल तय मानी जा रही है.

इस पूरे घटनाक्रम पर एबीपी लाइव ने आईआईएमसी के प्रोफेसर शिवाजी सरकार से विस्तार से बातचीत की.

क्या ईरान ट्रंप का अगला टारगेट है?

प्रोफेसर शिवाजी सरकार का कहना है कि ट्रंप खुद यह संकेत दे चुके हैं कि ईरान उनके अगले एजेंडे में है. हालांकि, यह विवाद नया नहीं है. “ईरान और अमेरिका के बीच तनाव दशकों पुराना है. ईरान के परमाणु ठिकानों पर पहले भी हमले हो चुके हैं,” वे बताते हैं कि जब चाबहार पोर्ट और अफगानिस्तान को लेकर भारत की भूमिका सामने आई, तब अमेरिका ने ईरान पर कुछ हद तक नरम रुख भी अपनाया था. ट्रंप को यह लगता है कि भारत के ज़रिए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का इस्तेमाल कर अमेरिका सेंट्रल एशिया तक अपनी पहुंच बना सकता है.

प्रोफेसर सरकार के मुताबिक, “अमेरिका की रणनीति किसी एक राष्ट्रपति तक सीमित नहीं होती. वहां 20–30 साल आगे की प्लानिंग होती है. राष्ट्रपति सिर्फ उस रणनीति को लागू करने वाला चेहरा होता है.”

अमेरिका आखिर चाहता क्या है?

इस सवाल के जवाब में शिवाजी सरकार कहते हैं कि 2007-08 के वित्तीय संकट के बाद से अमेरिका की आर्थिक स्थिति लगातार दबाव में रही है. कई देश डॉलर से दूरी बना रहे हैं. वैश्विक व्यापार में डॉलर की पकड़ कमजोर हो रही है. अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार पर दबाव बढ़ा है. “डॉलर लंबे समय तक अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत रहा है- चाहे वह ट्रेड हो या बॉन्ड्स के जरिए विदेशी निवेश. अब जब यह पकड़ कमजोर हो रही है, तो अमेरिका को अपनी अर्थव्यवस्था संभालने के लिए नए रास्ते चाहिए.”

युद्ध, हथियार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था

प्रोफेसर सरकार का कहना है कि अमेरिकी जनता युद्ध नहीं चाहती, लेकिन “अगर युद्ध नहीं होगा तो हथियार भी नहीं बिकेंगे.” यूक्रेन युद्ध अगर थमता है और इजरायल-गाजा संघर्ष शांत होता है, तो ईरान एक नया मोर्चा बन सकता है. हथियार उद्योग को ज़िंदा रखने के लिए टकराव जरूरी है—यह अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा है.

ईरान के तेल पर क्यों अमेरिका की नजर?

वे बताते हैं कि वेनेजुएला का तेल भले ही कम गुणवत्ता वाला हो, फिर भी अमेरिका ने उसके भंडार पर कब्जा किया. “इसके उलट ईरान का तेल दुनिया के बेहतरीन तेलों में गिना जाता है. अगर अमेरिका ईरान के तेल पर नियंत्रण पा लेता है, तो वह वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी बड़ी पकड़ बना सकता है.”

ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार चीन है. ऐसे में अमेरिका मानता है कि ईरान पर दबाव बढ़ाकर वह चीन की ऊर्जा सुरक्षा को भी कमजोर कर सकता है.

भारत और एशिया के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

अगर अमेरिका ईरान पर कोई बड़ा कदम उठाता है, तो ईरान और भारत के बीच की दूरी महज 1500 किलोमीटर रह जाती है. भारत की ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार पोर्ट, सेंट्रल एशिया तक पहुंच, चीन-पाकिस्तान समीकरण इन सभी पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. प्रोफेसर शिवाजी सरकार के मुताबिक, “यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के लिए गंभीर रणनीतिक संकट का संकेत है.”

वेनेजुएला के बाद ईरान पर बढ़ती अमेरिकी नजर यह साफ करती है कि तेल, डॉलर और वैश्विक प्रभुत्व की लड़ाई एक नए चरण में पहुंच चुकी है. अगर यह टकराव बढ़ता है, तो उसके असर मिडिल ईस्ट से निकलकर एशिया और भारत तक महसूस किए जाएंगे. भारत के लिए यह वक्त बेहद सतर्क कूटनीति और रणनीतिक संतुलन का है.

ये भी पढ़ें: भारत की IMF ने की ऐसी तारीफ, सुनकर चीन-पाकिस्तान से लेकर अमेरिका तक लगेगी मिर्ची



Source


Share

Related post

ईरान पर ग्राउंड अटैक की तैयारी में अमेरिका? वायरल नक्शे से आउट हुआ’सीक्रेट’ प्लान!

ईरान पर ग्राउंड अटैक की तैयारी में अमेरिका?…

Share मिडिल ईस्ट जंग के पार्ट-2 को दस दिन पूरे हो चुके हैं और अमेरिका की ईरान पर…
‘Going To Hit Them Very Hard’: Trump Renews Iran Strike Threat; Pezeshkian Calls It ‘Desperation’

‘Going To Hit Them Very Hard’: Trump Renews…

Share Last Updated:June 10, 2026, 22:29 IST Trump accused Iranian negotiators of dragging out peace talks and attempting…
Trump Draws Red Line On Iran, Says Won’t Resume Full-Scale War Unless Tehran Targets US Troops

Trump Draws Red Line On Iran, Says Won’t…

Share Last Updated:June 04, 2026, 06:56 IST Trump is resisting pressure to restart full-scale military action against Iran,…