• April 11, 2026

ओवैसी, गुलाम नबी और अब हुमायूं… क्या यह मुस्लिम नेता बीजेपी को पहुंचाते फायदा? पढ़ें एनालिसिस

ओवैसी, गुलाम नबी और अब हुमायूं… क्या यह मुस्लिम नेता बीजेपी को पहुंचाते फायदा? पढ़ें एनालिसिस
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पश्चिम बंगाल में AJUP नेता हुमायूं कबीर के वायरल वीडियो के बाद से फिर मुस्लिम नेतओं पर दिन भारी पड़ने लगे हैं. असदुद्दीन ओवैसी, गुलमान नबी आजाद और बदरुद्दीन अजमल जैसे नेता फिर चर्चा में आए. कई बार इन नेताओं पर बीजेपी के लिए काम करने के आरोप लगते रहे हैं. कहा जाता है कि यह मुस्लिम नेता मुसलमानों के वोट काटकर बीजेपी को फायदा देते हैं. लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है और लिस्ट में कौन शामिल है? समझते हैं एक्सप्लेनर में…

सवाल 1: हुमायूं कबीर पर क्या आरोप हैं और मामला क्या है?
जवाब: हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से पूर्व TMC विधायक हैं. उन्होंने TMC से सस्पेंड होने के बाद अपनी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाई. 9 अप्रैल 2026 को TMC ने एक स्टिंग ऑपरेशन की वायरल वीडियो जारी की, जिसमें कबीर कथित तौर पर कह रहे हैं कि बीजेपी के साथ उनकी ‘कवरट’ समझ है. वीडियो में वे 1000 करोड़ रुपए (कुछ रिपोर्ट्स में 200 करोड़ रुपए) की डील का जिक्र करते हुए कहते हैं कि बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाकर मुस्लिम वोटरों को प्रभावित करेंगे. इससे TMC के मुस्लिम वोट बंटेंगे और बीजेपी को 100-120 सीटें मिल जाएंगी. TMC का आरोप है कि कबीर बीजेपी के ‘एजेंट’ हैं और मुस्लिम वोट बांटकर ममता बनर्जी को हराने की साजिश में शामिल हैं. कबीर ने वीडियो को AI-जनरेटेड और फर्जी बताया है.

 

हुमायूं कबीर वीडियो में कह रहे हैं कि बीजेपी के साथ उनकी ‘कवरट’ समझ है

सवाल 2: असदुद्दीन ओवैसी और AIMIM पर क्या आरोप लगते रहे हैं?
जवाब: असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पर लंबे समय से आरोप है कि वे मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़कर कांग्रेस और TMC जैसी विपक्षी पार्टियों के वोट बांटते हैं, जिससे बीजेपी को फायदा होता है. बंगाल में हाल ही में AIMIM ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन किया था, लेकिन 10 अप्रैल 2026 को वीडियो वायरल होने के बाद गठबंधन तोड़ दिया. TMC नेता तन्मय घोष और अन्य का कहना है कि ओवैसी के कदम मुस्लिम वोट बांटते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी की मदद करते हैं.

ओवैसी का पक्ष है कि वे मुस्लिम हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं और TMC ने मुस्लिमों के लिए कुछ नहीं किया. कई मौकों पर ओवैसी कह चुके हैं, ‘हम किसी साजिश में नहीं, मुस्लिमों की आवाज हैं.’

सवाल 3: कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे गुलाम नबी आजाद पर क्या आरोप हैं?
जवाब: गुलाम नबी आजाद पूर्व कांग्रेस नेता हैं. उन्होंने 2022 में कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी DPAP बनाई. कांग्रेस में राहुल गांधी गुट का आरोप है कि वे बीजेपी के साथ मिलकर काम करते हैं, खासकर जम्मू-कश्मीर में. विपक्ष कहता है कि DPAP के जरिए मुस्लिम वोट बंटने से बीजेपी को जम्मू-कश्मीर में फायदा हुआ. हालांकि, आजाद का कहना है कि वे कांग्रेस की गलत नीतियों के खिलाफ हैं. यह आरोप पुराना है लेकिन ‘अब’ फिर चर्चा में आया है क्योंकि लोगों ने इसे तीसरे नाम के रूप में उठाया है.

सवाल 4: इनके अलावा किन नेताओं पर बीजेपी के सपोर्ट के आरोप लगते हैं?
जवाब: इन तीन बड़े नेताओं के बाद सबसे प्रमुख नाम असम की AIUDF पार्टी के बदरुद्दीन अजमल का है. असम में कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां आरोप लगाती हैं कि AIUDF मुस्लिम वोट बांटकर बीजेपी को फायदा पहुंचाती है. 2016-2021 असम चुनावों में कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने आरोप लगाया था कि AIUDF और बीजेपी के बीच ‘टैक्टिकल डील’ है. AIUDF मुस्लिम बहुल सीटों पर लड़कर कांग्रेस वोट बांटती है. 2019 लोकसभा में अजमल ने कहा था, ‘कांग्रेस ने हमें धोखा दिया, उनके मुस्लिम नेता ने एलायंस तोड़ा. नतीजा बीजेपी को फायदा हो गया. 2021 में AIUDF ने दावा किया कि कुछ बीजेपी उम्मीदवारों ने उन्हें ‘ग्रैंड एलायंस’ का समर्थन करने को कहा है. अजमल ने बचाव में बयान दिया, ‘हम मुस्लिमों के हित में लड़ते हैं, कोई डील नहीं है.’ यह आरोप पुराना है लेकिन असम चुनावों में बार-बार उठते हैं.

सवाल 5: ये आरोप क्यों लगते हैं और इनका आधार क्या है?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो इन आरोपों का मुख्य आधार मुस्लिम वोटरों की एकजुटता है. 2021 बंगाल चुनाव में मुस्लिम वोट बड़े पैमाने पर TMC के पीछे थे. अब अगर AJUP या AIMIM जैसी कोई नई पार्टी मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट बांटे तो बीजेपी को फायदा हो सकता है. वीडियो में कबीर का कथित बयान इसी साजिश का सबूत माना जा रहा है. ओवैसी पर भी बिहार, महाराष्ट्र, असम आदि में इसी तरह के आरोप लग चुके हैं. गुलाम नबी आजाद पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कांग्रेस छोड़ने और कुछ बयानों के आधार पर आरोप लगे.

बंगाल चुनाव में TMC का कहना है कि मुस्लिम वोट बंटने से बीजेपी को फायदा होगा. हुमायूं के वीडियो के बाद AIMIM अब अकेले लड़ेगी. हालांकि, वीडियो कांड के बाद मुस्लिम वोटरों में सतर्कता बढ़ गई है. सुप्रीम कोर्ट में वोटर लिस्ट डिलीशन के मामले भी चल रहे हैं, जिससे यह मुद्दा और गरमाया हुआ है.



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