• September 23, 2026

Explained: भारत के 30 करोड़ बेसिक मोबाइल फोन यूजर्स को राहत, TRAI ने कर दिया ये बड़ा ऐलान

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टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने आधिकारिक तौर पर ‘टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन (तेरहवां संशोधन) रेगुलेशन, 2026’ जारी किया है. इससे लगभग 30 करोड़ मोबाइल यूजर्स को बड़ी राहत मिली है.  खासकर उन लोगों को अधिक राहत मिली है जो फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं या कम आय वाले ग्रुप से हैं और मोबाइल डेटा का इस्तेमाल नहीं करते हैं.

इस नए नियम के तहत, टेलीकॉम कंपनियों जैसे रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के लिए यह ज़रूरी कर दिया गया है कि वे सस्ते, सिर्फ वॉइस और SMS वाले रिचार्ज वाउचर ऑफर करें. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ग्राहकों को ऐसे डेटा बंडल के लिए पैसे न देने पड़ें जिनकी उन्हें ज़रूरत नहीं है.

TRAI के आदेश की मुख्य बातें

कीमत में कटौती: वॉइस, SMS और डेटा वाले हर बंडल प्लान के लिए, ऑपरेटर्स को अब उसी अनुपात में कम कीमत पर सिर्फ वॉइस और SMS वाला पैक भी देना होगा.

कम वैलिडिटी वाले ज़रूरी विकल्प: टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 30 दिन या उससे कम वैलिडिटी वाले सभी प्लान के लिए ये विकल्प देने होंगे. पहले, ज़्यादातर स्टैंडअलोन प्लान लंबी वैलिडिटी (जैसे 84 या 365 दिन) तक ही सीमित थे.

सही मायने में हर महीने रिन्यू होने वाला प्लान: ऑपरेटर्स को कम से कम एक ऐसा वॉइस-और-SMS वाउचर देना होगा जो हर महीने ठीक उसी तारीख को रिन्यू हो. इससे बिना डेटा वाले यूज़र्स के लिए 28-दिन के सख्त बिलिंग साइकल की ज़रूरत खत्म हो जाएगी. अगर किसी महीने में वह खास तारीख नहीं आती है (जैसे 29 फरवरी), तो प्लान उस महीने के आखिरी दिन रिन्यू होगा.

टैरिफ लॉक-इन में रुकावट: यह फ़ैसला हाल ही में बढ़ाई गई टैरिफ कीमतों और ऑपरेटर्स की उन आक्रामक रणनीतियों से सीधे निपटता है, जिनका मकसद 2G फ़ीचर-फ़ोन यूज़र्स को महंगे 4G/5G डेटा-बंडल वाले प्लान लेने के लिए मजबूर करना था.

रेगुलेशन में यह बदलाव टेलीकॉम की कीमतों में निष्पक्षता सुनिश्चित करता है. इससे बुज़ुर्ग नागरिकों, ग्रामीण ग्राहकों और कम खर्च वाला सेकेंडरी सिम कार्ड रखने वाले लोगों के लिए मोबाइल कनेक्शन चालू रखना काफ़ी सस्ता हो जाएगा.

यूज़र्स जल्द ही इन नए तरह के “सिर्फ़ वॉइस” या “बिना डेटा” वाले पैकेज को सीधे अपने प्रोवाइडर के मोबाइल ऐप या ऑफ़िशियल वेबसाइट पर देख और चुन सकेंगे.

इसकी ज़रूरत क्यों थी?
हालांकि 2024 के एक नियम में टेलीकॉम कंपनियों के लिए कम से कम एक ‘सिर्फ़-वॉयस’ प्लान देना ज़रूरी था, लेकिन ऑपरेटरों ने इसका तोड़ निकाल लिया. उन्होंने ऐसे डेटा-फ़्री प्लान्स को सिर्फ़ महंगे और लंबे समय वाले ऑप्शन (जैसे 84-दिन या 365-दिन के पैक) तक ही सीमित कर दिया. कम आय वाले यूजर्स के लिए इतनी ज़्यादा शुरुआती कीमत चुकाना मुमकिन नहीं था, इसलिए उनके पास सिर्फ 28-दिन की वैलिडिटी पाने के लिए भी डेटा-बंडल वाले पैक खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं बचा.

लाखों भारतीय सिर्फ़ बैंकिंग अलर्ट, टेक्स्ट मैसेज या जरूरी सरकारी OTP पाने के लिए एक दूसरा सिम कार्ड रखते हैं. इस नियम से पहले, इन दूसरे नंबरों को चालू रखने के लिए ऐसे बंडल इंटरनेट डेटा के लिए भी भारी कीमत चुकानी पड़ती थी जिसका इस्तेमाल नहीं होता था.

बिना बंडल वाले प्लान न होने की वजह से ग्रामीण आबादी, बुज़ुर्गों और बेसिक फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को बहुत ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिससे बुनियादी डिजिटल जुड़ाव और वित्तीय बातचीत में एक बनावटी रुकावट पैदा हो रही थी.



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