• July 5, 2025

भारतीयों को लोकतंत्र पर कितना यकीन? प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

भारतीयों को लोकतंत्र पर कितना यकीन? प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
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Democracy in India: दुनिया में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, कहीं लोग संतुष्ट हैं, तो कहीं बेहद नाराज, लेकिन एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने भारत को लोकतांत्रिक संतोष के मामले में एक मिसाल बना दिया है. विकसित देशों में लोकतंत्र को लेकर गहराता असंतोष जहां चिंता का विषय बन रहा है, वहीं भारत में लोग अपने लोकतंत्र के कामकाज से काफी संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं.

भारत बना लोकतांत्रिक संतोष का वैश्विक उदाहरण
इस सप्ताह जारी प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सार्वजनिक लोकतांत्रिक संतोष के मामले में शीर्ष देशों में शामिल हो गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 23 देशों में किए गए सर्वे में 74 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे अपने देश के लोकतंत्र से संतुष्ट हैं. यह आंकड़ा भारत को दुनिया में सबसे अधिक लोकतांत्रिक संतुष्टि वाले देशों की सूची में लाकर खड़ा कर देता है. स्वीडन 75 प्रतिशत के साथ इस लिस्ट में सबसे आगे है.

इसके विपरीत, जापान में सबसे कम संतोष पाया गया, जहां केवल 24 प्रतिशत लोग अपने लोकतंत्र से खुश हैं. यह विरोधाभास दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोकतंत्र की स्वीकार्यता और स्थिति को समझने का अहम संकेत है.

विकसित देशों में लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ता असंतोष
रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च आय वाले देशों जैसे फ्रांस, ग्रीस, इटली, जापान और दक्षिण कोरिया में लोगों में लोकतंत्र के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को लेकर भी गहरी नाराज़गी है. भारत जैसे देशों में जहां आर्थिक विकास और स्थिरता लोगों के भरोसे को मजबूत करते हैं, वहीं विकसित देशों में आर्थिक असंतुलन और नीतिगत असहमति के कारण लोकतंत्र पर लोगों का भरोसा कम होता दिख रहा है.

पूरे सर्वेक्षण में शामिल 23 देशों में औसतन 58 प्रतिशत वयस्कों ने अपने लोकतांत्रिक सिस्टम से असंतोष जताया. 2017 में यह संख्या 49 प्रतिशत थी, यानी संतोष का स्तर समय के साथ गिरा है, खासकर कोविड-19 के बाद से.

ग्रीस, जापान और दक्षिण कोरिया में असंतोष चरम पर
लोकतंत्र से सबसे अधिक असंतोष ग्रीस में दर्ज किया गया, जहां 81 प्रतिशत लोगों ने नाराज़गी जताई. जापान में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में 71 प्रतिशत रहा. इन देशों में लोकतंत्र को लेकर निराशा सिर्फ नीतियों से नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व की कमी से भी जुड़ी है. लोग मानते हैं कि उनकी आवाज़ न सरकार में सुनी जा रही है, न ही वे खुद को सत्ता में हिस्सेदार महसूस करते हैं.

असंतोष का मतलब लोकतंत्र से मोहभंग नहीं
रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि यह असंतोष लोकतंत्र से नफरत नहीं, बल्कि उसके कामकाज को लेकर चिंता है. दुनिया भर में आज भी बहुसंख्यक लोग मानते हैं कि प्रतिनिधि लोकतंत्र एक बेहतर शासन प्रणाली है. लेकिन बहुत से लोग इस बात को लेकर दुखी हैं कि राजनीतिक नेता आम जनता की बातों को नजरअंदाज़ कर देते हैं और अभिजात वर्ग के बीच ही सत्ता सिमट कर रह गई है.

चुनाव और अर्थव्यवस्था से जुड़ी है लोकतंत्र में संतुष्टि
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जिन देशों में हाल में चुनाव हुए हैं, वहां लोकतंत्र से संतुष्टि बढ़ी है. उदाहरण के लिए कनाडा, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में लोकतंत्र को लेकर भरोसा बढ़ा है. वहीं पोलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में चुनाव बाद लोकतंत्र को लेकर भरोसा घटा है.

पोलैंड में 54 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में 74 प्रतिशत लोगों ने लोकतंत्र से असंतोष जताया है. यह दर्शाता है कि सरकार की जवाबदेही और चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा सीधे तौर पर लोकतंत्र के प्रति उनकी संतुष्टि को प्रभावित करता है.



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