• May 25, 2026

शांति दूत बना पाकिस्तान अब बन सकता है ‘खलनायक’! ट्रंप के अब्राहम अकॉर्ड्स से फंस गए शहबाज

शांति दूत बना पाकिस्तान अब बन सकता है ‘खलनायक’! ट्रंप के अब्राहम अकॉर्ड्स से फंस गए शहबाज
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Trump’s Abraham Accord: पाकिस्तान के सामने एक ऐसी दुविधा खड़ी हो गई है, जिसमें अगर वह मानता है तो भी फंसेगा और अगर इनकार करता है तो और ज्यादा मुश्किल में पड़ जाएगा. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वीकेंड पर पाकिस्तान समेत कई देशों के साथ एक उच्च स्तरीय कॉन्फ्रेंस कॉल की.

‘एक्सियोस’ के अनुसार, ट्रंप ने अधिक से अधिक मुस्लिम देशों से अपील की कि वे ईरान युद्ध के बाद अब्राहम अकॉर्ड से जुड़ें, जिसका सीधा मतलब इज़रायल को औपचारिक मान्यता देना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्ताव के बाद कॉल में कुछ समय के लिए सन्नाटा छा गया. इसके बाद ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में पाकिस्तान समेत अन्य देशों से पूछा कि क्या वे अभी भी लाइन पर हैं.

क्यों फंस गया पाकिस्तान?

दरअसल, पाकिस्तान की मुश्किल यह है कि वह एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति दूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप के इस प्रस्ताव ने उसे असमंजस की स्थिति में डाल दिया है. अगर पाकिस्तान इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो उसे घरेलू विरोध और अपनी पारंपरिक विदेश नीति से समझौता करना पड़ेगा, जबकि इनकार करने पर अमेरिका के साथ उसके संबंध प्रभावित हो सकते हैं. यही कारण है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गया है.

फिलिस्तीन का मुद्दा पाकिस्तान की जनता के लिए हमेशा से बेहद भावनात्मक रहा है. ऐसे में, बिना किसी स्पष्टता के इज़रायल को औपचारिक मान्यता देना उस स्थिति के समान होगा, जैसे बारूद के ढेर पर बैठना जो कभी भी विस्फोटक रूप ले सकता है.

पाकिस्तान के लिए बारुद के ढेर पर बैठने जैसा

पाकिस्तान की सेना और शहबाज सरकार दोनों ही यह अच्छी तरह जानते हैं कि इज़रायल के साथ औपचारिक रूप से संबंध स्थापित करना उनके लिए राजनीतिक रूप से आत्मघाती कदम साबित हो सकता है.  

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2020 में अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए गए थे. उस समय व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के विदेश मंत्री भी मौजूद थे. हालांकि, पाकिस्तान ने इस समझौते से दूरी बनाए रखी और इसे लेकर अपनी अनिच्छा जाहिर करते हुए इसे ‘नए मध्य पूर्व’ की अवधारणा के लिए प्रतिकूल बताया था.

उस समय पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी अब्राहम अकॉर्ड्स से जुड़ने से इनकार करते हुए कहा था कि ऐसा करना पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे ‘दो-राष्ट्र समाधान’ के समर्थन और उसकी विदेश नीति के सिद्धांतों के खिलाफ होगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्होंने कतर सहित सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन और तुर्की से आग्रह किया है कि वे इज़रायल के साथ संबंध सामान्य करने के लिए अब्राहम अकॉर्ड से जुड़ें, क्योंकि वह ईरान के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों में लगे हुए हैं. ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने शनिवार को कई देशों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की थी, और संयुक्त अरब अमीरात तथा बहरीन पहले ही इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं.

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